Home छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और समान नागरिक अधिकारों...

समान नागरिक संहिता से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और समान नागरिक अधिकारों को मिलेगी मजबूती

5
0
Jeevan Ayurveda

bplnews24:

रायपुर

Ad

 छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी और जनसंवाद का क्रम जारी है। इसी कड़ी में स्वयंप्रभा फाउंडेशन एवं आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित, रायपुर के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना। समिति की ओर से सुझावों के समुचित परीक्षण एवं विचार-विमर्श के दौरान उन्हें संज्ञान में लेने की बात कही गई। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि व्यापक जनभागीदारी और विभिन्न समुदायों के विचारों के आधार पर तैयार की जाने वाली समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

 प्रतिनिधियों ने सुझाव प्रस्तुत किया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार, महिलाओं को न्यायपूर्ण संरक्षण और समाज में समानता एवं समरसता को बढ़ावा देना होना चाहिए। साथ ही छत्तीसगढ़ की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। स्वयंप्रभा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शिव नारायण मुंदड़ा,  डॉ. मुकेश शाह तथा आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित के अध्यक्ष श्री इन्द्रनाथ सिंह ने समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति एवं पारिवारिक अधिकारों से जुड़े कानूनों में समानता स्थापित होने से नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में सुविधा होगी, इससे कानूनी प्रक्रियाओं के सरलीकरण और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था विकसित करने में सहायता मिलेगी।

प्रतिनिधियों ने महिलाओं के अधिकारों को विशेष प्राथमिकता देते हुए कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं, भरण-पोषण संबंधी असमानताओं और संपत्ति के अधिकारों में भेदभाव को दूर करने की दिशा में प्रभावी प्रावधान किए जाने चाहिए। विशेष रूप से बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार तथा महिलाओं को विवाह और तलाक के मामलों में न्यायपूर्ण संरक्षण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।

 प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की लगभग 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदायों की है। इन समुदायों की अपनी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराएं हैं। इसलिए समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले इनकी परंपराओं, सामाजिक हितों और संवैधानिक संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं पर भी सुझाव दिए गए। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे संबंधों के पंजीयन की उपयुक्त कानूनी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के उत्तराधिकार, संपत्ति संबंधी अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट एवं न्यायसंगत प्रावधान आवश्यक हैं।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here