Home छत्तीसगढ़ बच्चों की थाली बनी सामूहिक जिम्मेदारी, प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में...

बच्चों की थाली बनी सामूहिक जिम्मेदारी, प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वच्छता पर जोर

3
0
Jeevan Ayurveda

bplnews24:

बच्चों की थाली बनी सामूहिक जिम्मेदारी, प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वच्छता पर जोर

Ad

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश के साथ समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का अभियान

रायपुर
 राज्य में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ और ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान व्यापक रूप से चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पोषण अभियान और यूनिसेफ के सहयोग से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को गर्म, ताजा, पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोस्टर एवं जागरूकता सामग्री के माध्यम से अभिभावकों और समुदाय को बताया जा रहा है कि वे बच्चों की थाली की गुणवत्ता और स्वच्छता पर नजर रखें। भोजन साफ-सफाई से तैयार हो रहा है या नहीं, उसका स्वाद एवं गुणवत्ता कैसी है, बच्चों को क्या और किस प्रकार परोसा जा रहा है—इन विषयों पर चर्चा करने के साथ आवश्यकतानुसार सुधार के सुझाव देने और उसमें सहयोग करने के लिए भी समुदाय को प्रेरित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने 12 सितम्बर को राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह रथ गांव-गांव पहुंचकर माताओं, परिवारों और समुदाय को संतुलित आहार, स्वच्छता तथा बच्चों के शुरुआती विकास के प्रति जागरूक कर रहा है। इसके साथ ही विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से बच्चों के विकास की समय पर पहचान, परामर्श तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी सेवा भाव से किया जा रहा है।

सेवा की कहानी : आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की थाली से जुड़ी सामुदायिक भागीदारी

प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह के दौरान बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मूल्य को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्व-सहायता समूहों और समुदाय द्वारा मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों द्वारा भोजन कम ग्रहण किए जाने की स्थिति में माताओं से चर्चा कर भोजन के स्वाद और परोसने के तरीके में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय एवं मौसमी सब्जियों, दाल और मिलेट जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के साथ रसोई की स्वच्छता और भोजन परोसते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों के नियमित वजन एवं विकास की निगरानी भी की जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में होने वाले बदलावों की समय पर पहचान की जा सके।
इन प्रयासों से आंगनबाड़ी केंद्रों में समुदाय की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब अभिभावक और ग्रामीण भी बच्चों के भोजन की गुणवत्ता, मेनू और स्वच्छता के बारे में जानकारी लेने के साथ आवश्यक सुझाव दे रहे हैं। यह पहल ‘सेवा की कहानी’ के रूप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की जिम्मेदारी को सामने ला रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों, पंचायतों, अभिभावकों और समुदाय को पोषण संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। 9 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में रंग-बिरंगी थाली प्रदर्शन, पोषण मेला, माता-पिता की बैठकें, स्वच्छता अभियान और विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ केवल एक संदेश नहीं, बल्कि प्रदेश के हर बच्चे को स्वस्थ, सुपोषित और बेहतर भविष्य देने का सामूहिक संकल्प है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह संकल्प धरातल पर साकार हो रहा है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here