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निर्देशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं, लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मंत्री सिंह

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भोपाल

लोक निर्माण से लोक कल्याण

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लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा है कि विभागीय निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, वित्तीय अनुशासन एवं जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्री एवं प्रमुख सचिव स्तर से दिए गए निर्देशों का निर्धारित समय-सीमा में पालन करना प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है। निर्देशों की अनदेखी करने, प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री  सिंह ने कहा कि जिस क्षेत्र में सड़क खराब पाई जाएगी, वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी। सड़कों के रखरखाव, समय पर मरम्मत तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित कार्यपालन यंत्री की होगी। लापरवाही के कारण सड़क खराब होने अथवा वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सड़क की समय पर मरम्मत नहीं किए जाने पर संबंधित कार्यपालन यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

लोक निर्माण मंत्री  सिंह की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में आयोजित मुख्य अभियंता कॉन्फ्रेंस में विभागीय निर्माण कार्यों, औचक निरीक्षणों पर की गई कार्रवाई, बिटुमेन की आपूर्ति एवं देयकों के सत्यापन, सड़कों की गुणवत्ता, लोक कल्याण सरोवरों, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा विभागीय निर्देशों के पालन की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव लोक निर्माण  सुखवीर सिंह, एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक  भरत यादव, एमपीबीडीसी के प्रबंध संचालक  सीबी चक्रवर्ती एम., प्रमुख अभियंता तथा सभी मुख्य अभियंता उपस्थित रहे।

मंत्री  सिंह ने औचक निरीक्षणों के अंतर्गत पाई गई अनियमितताओं पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए पूछा कि दोषी पाए गए कितने ठेकेदारों को अब तक ब्लैकलिस्ट किया गया है। कुछ मुख्य अभियंताओं द्वारा ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग कार्रवाई लंबित रखे जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

मंत्री  सिंह ने कहा कि औचक निरीक्षण केवल कमियां चिह्नित करने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। निरीक्षण में मिली अनियमितताओं पर समयबद्ध एवं परिणाममूलक कार्रवाई होनी चाहिए। जिन ठेकेदारों के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग के निर्देश दिए गए हैं, उनके प्रकरणों में नियमानुसार तत्काल कार्रवाई पूर्ण कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। कार्रवाई लंबित रखने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होने कहा की औचक निरीक्षण में ईएनसी भी जायें।

मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि सरकारी रिफाइनरियों से प्राप्त बिटुमेन से संबंधित सभी देयकों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाए। बिटुमेन की वास्तविक आपूर्ति, चालान, मात्रा, उपयोग एवं भुगतान संबंधी अभिलेखों का पूर्ण मिलान किए बिना किसी भी देयक का भुगतान नहीं किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यापन के बिना यदि एक भी भुगतान पाया गया तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बिना सत्यापन जितनी राशि का भुगतान किया गया होगा, उसकी वसूली भी संबंधित अधिकारी से की जाएगी। बैठक में सरकारी रिफाइनरियों से बिटुमेन की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था तथा निर्माण स्थलों पर उसके उपयोग की भी समीक्षा की गई।

मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि मुख्य अभियंता अपने-अपने परिक्षेत्र की सड़कों की नियमित निगरानी करें। वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों तथा जलभराव वाले स्थानों को प्राथमिकता से चिह्नित कर शीघ्र मरम्मत कार्य कराया जाए। सड़क की खराब स्थिति के कारण आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा अथवा दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।

मंत्री  सिंह ने सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिए कि सड़क श्रेणियों के युक्तियुक्तकरण संबंधी प्रस्ताव 3 अगस्त, 2026 तक तैयार कर प्रमुख सचिव एवं मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। प्रस्ताव तैयार करते समय वर्तमान यातायात, क्षेत्रीय आवश्यकताओं, औद्योगिक एवं कृषि गतिविधियों, पर्यटन तथा भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने लोक कल्याण सरोवरों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्र में निर्माणाधीन सरोवरों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियंता यह सुनिश्चित करें कि सरोवर निर्धारित मापदंडों एवं जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही बनाए जाएं।

मंत्री  सिंह ने लोक कल्याण सरोवरों को और अधिक उपयोगी एवं जनोपयोगी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थल चयन, जल संग्रहण क्षमता, जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, सौंदर्यीकरण तथा आसपास के क्षेत्र की उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। वर्ष 2026 में प्रदेश में 510 लोक कल्याण सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण केवल उपस्थिति दर्ज कराने अथवा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की औपचारिकता नहीं होना चाहिए। प्रशिक्षण में आने वाला प्रत्येक अधिकारी एवं अभियंता कुछ नया सीखकर जाए तथा प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने कार्यक्षेत्र में करे। उन्होंने प्रशिक्षण की विषय-वस्तु को मैदानी आवश्यकताओं, नवीन निर्माण तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण तथा व्यावहारिक समस्याओं के समाधान से जोड़ने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण के उपरांत प्रतिभागियों से फीडबैक लेने तथा सीखी गई तकनीकों के मैदानी उपयोग की समीक्षा करने को भी कहा। मार्ग निर्माण में बैच मिक्‍स प्‍लांट का ही उपयोग किया जाए। ड्रम मिक्‍स प्‍लांट का उपयोग केवल पेच रिपेयर कार्यों में किया जाए। तदानुसार एस.ओ.आर. में भी संशोधन के दिए निर्देश

मंत्री  सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा जारी विभिन्न परिपत्रों एवं दिशा-निर्देशों के संबंध में आगामी बैठक में मुख्य अभियंताओं से प्रश्नावली भरवाई जाएगी। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि अधिकारी विभागीय परिपत्रों को पढ़ते, समझते तथा उनका पालन करते हैं अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि विभागीय निर्देश केवल कार्यालयीन अभिलेखों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।मंत्री  सिंह ने कहा कि पुरस्कारों के चयन में उत्कृष्ट कार्य, नवाचार, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा जनहित में किए गए प्रभावी कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

कॉन्फ्रेंस में संभागीय कार्यालयों के ऑडिट, अभिलेख संधारण, वित्तीय प्रक्रियाओं तथा कार्यालयीन कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। लंबित ऑडिट आपत्तियों का समयबद्ध निराकरण करने तथा देयकों के परीक्षण, स्वीकृतियों एवं वित्तीय अभिलेखों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में ग्रीन बिल्डिंग मानकों तथा गृहा काउंसिल के साथ हुए एमओयू की प्रगति की भी समीक्षा की गई। नवीन शासकीय भवनों में ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, प्राकृतिक प्रकाश, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री तथा अपशिष्ट प्रबंधन के मापदंडों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रदेश के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के निर्माण एवं क्रियान्वयन पर चर्चा करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि उत्पादन केंद्रों, पर्यटन स्थलों तथा नगरीय क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।

भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से विकसित किए जा रहे इंसिडेंट रिपोर्टिंग सिस्टम, बजट मॉड्यूल एवं डीपीआर मॉड्यूल की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन डिजिटल प्रणालियों में समय पर जानकारी दर्ज करने तथा परियोजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के संबंध में मुख्य अभियंताओं से सुझाव लिए गए।

बैठक में लोकपथ ऐप के माध्यम से प्राप्त सड़क पर गड्ढों एवं अन्य सड़क संबंधी शिकायतों के निराकरण की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि प्रदेश का कोई भी नागरिक अपने मोबाइल फोन से लोकपथ ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है, जिनका विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार 4 दिनों के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाता है। समीक्षा के दौरान अवगत कराया गया कि ऐप के माध्यम से प्राप्त 99 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है।

कॉन्फ्रेंस में अभियंता दिवस (15 सितंबर, 2026) पर दिए जाने वाले लोक निर्माण पुरस्कारों के लिए नामांकन, चयन प्रक्रिया तथा लोक कल्याण सूचकांक के उपयोग पर भी चर्चा की गई।

 

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