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MP के टाइगर रिजर्व में रिकॉर्ड पर्यटन, 10 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने किया बाघों का दीदार; आज से बंद होंगे पार्क

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उमरिया
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में इस पर्यटन सत्र में वन्यजीव प्रेमियों का उत्साह देखने को मिला है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में इस बार 10 लाख से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी कर बाघों और अन्य वन्य प्राणियों का दीदार किया है। वहीं मंगलवार को शाम को सफारी के बाद प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के द्वार पर्यटकों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जंगल में तीन महीने का विश्राम काल शुरू हो जाएगा। एक अक्टूबर से टाइगर रिजर्व के गेट खुलेंगे।

बांधवगढ़ में पहुंचे 2 लाख से ज्यादा पर्यटक
बांधवगढ़ में दो लाख से ज्यादा पर्यटकों ने बाघों के दीदार किए हैं, जबकि मध्य प्रदेश के छह टाइगर रिजर्व बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और संजय धुबरी में इस साल आठ लाख से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी मिली है। हालांकि अधिकृत आंकड़े एक जुलाई तक ही उपलब्ध हो पाएंगे।

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तीन माह बंद रहेंगे पार्क
बरसात के तीन महीने- जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान जंगल में बाघ सहित अन्य वन्यजीवों को शांत वातावरण मिलेगा। इस अवधि में टाइगर रिजर्व प्रबंधन सफारी मार्गों की मरम्मत, पर्यटकों की सुविधाओं में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी करेगा। विश्राम अवधि वन्यजीवों के प्रजनन और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान जंगल में मानवीय दखल कम होने से वे प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगे।

इसलिए बंद होते हैं पार्क
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि वर्षाकाल में सुरक्षा की दृष्टि से पार्क बंद किए जाते हैं। वर्षाकाल में जंगल के अंदर के कच्चे रास्तों में वाहनों के फंसने का खतरा रहता है। दूसरी तरफ वन्य प्राणी भी अधिक हिंसक हो जाते हैं।

बफर में जारी रहेगा पर्यटन
अलबत्ता, टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां जारी रहेंगी। यहां पर्यटक बारिश के मौसम में हरियाली से भरपूर जंगल, झरनों और वन्य प्राणियों की गतिविधियों का आनंद उठा सकेंगे। वहीं पार्क बंद होने के बाद जंगल और पर्यटन पर निर्भर रहने वाले प्रदेश के लगभग 20 हजार परिवारों का आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

कूनो भी 30 सितंबर तक बंद होगा
उधर, श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क के गेट मंगलवार शाम से आगामी तीन महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद हो जाएंगे। चीता परियोजना शुरू होने के बाद से यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। यहां लंबे समय से दिखाई नहीं दिए जंगली कुत्ते, दुर्लभ जंगली बिल्ली (कैरोल) विलुप्त प्रजाति के उल्लू, काले हिरण से लेकर कई प्रकार के अन्य वन्यजीव नजर आने लगे हैं। कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते हैं। इनमें से 32 कूनो की धरती पर जन्मे शावक हैं। 19 खुले जंगल में हैं।

कूनो के जंगल के रास्ते पर आया चीता, करीब एक घंटे रुकी रही सफारी 
कूनो नेशनल पार्क के अंदर चीता सफारी से जंगल भ्रमण कर रहे पर्यटक तब खुशी से झूम उठे जब अचानक जंगल से निकलकर एक चीता उनके रास्ते के सामने आ गया और रास्ते पर ही बैठा रहा, इस दौरान करीब एक घंटे तक सफारी के पहिए थम गए, पर्यटक आनंदित हो उठे, उन्होंने नजारे को अपने मोबाइल के कैमरे में रिकार्ड कर लिया, अब चीता का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।

 

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