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महेश्वर: अहिल्या घाट पर लाइट शो और लक्खा की भजन संध्या से शुरू होगा निमाड़ उत्सव

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महेश्वर

 मां अहिल्या की नगरी महेश्वर में 22 से 24 नवंबर तक निमाड़ उत्सव 2025 आयोजित किया जा रहा है। इसमें तीन दिनों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ अहिल्या घाट पर लाइट एंड साउंड शो होगा। पहले दिन 22 नवंबर की शाम 7 बजे उत्सव का शुभारंभ होगा। उद्घाटन के बाद सुप्रसिद्ध गायक लखविंदर लख्खा और साथी भक्ति संगीत की प्रस्तुति देंगे। इसी दिन अत्याधुनिक तकनीक से तैयार लाइट एंड साउंड शो का लोकार्पण किया जाएगा।

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महेश्वर के अहिल्या घाट पर लाइट एंड साउंड शो तकनीक और परंपरा का अद्वितीय संयोजन साबित होने जा रहा है। महेश्वर का यह शो अत्याधुनिक तकनीक नवाचार, सटीक इंजीनियरिंग कौशल और विरासत धरोहर संवर्द्धन  संरक्षण को एक साथ समाहित करने वाला देश के चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में शुमार हो गया है। यह प्रोजेक्ट कई अभूतपूर्व चुनौतियों को पार कर तैयार किया गया है, जो इसे देश का सबसे अनोखा और जटिल शो बनाता है।

नदी के बदलते जलस्तर के बीच हाइड्रॉलिक सिस्टम का विकास
घाट के किनारे प्रोजेक्टर इंस्टॉल करने में सबसे बड़ी बाधा नर्मदा का लगातार बदलता जलस्तर रहा। प्रोजेक्टर की ऊंचाई अधिक रखने से नाविकों और पर्यटकों को किले का स्पष्ट दृश्य प्रभावित होता, ऐसे में पहली बार नदी की स्थिति के अनुरूप कस्टम हाइड्रॉलिक सिस्टम तैयार किया गया।

यह सिस्टम पानी के दबाव, लहरों और जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रोजेक्टर को स्थिर रखने में सक्षम है। वॉटर-कोरोजन रेजिस्टेंट डिजाइन, प्रेशर कंट्रोल तकनीक और प्रोजेक्शन की सटीकता बनाए रखना इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। महेश्वर किले की ऐतिहासिक संरचना को देखते हुए टीम ने बिना कील या ड्रिलिंग के लाइटिंग, लेजर, साउंड और वायरिंग का पूरा सेटअप तैयार किया।

कमिश्नर दीपक सिंह की रही अहम भूमिका
नर्मदा तट पर इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने में इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनकी निरंतर मॉनिटरिंग, समयबद्ध समीक्षा और फील्ड स्तर पर की गई मार्गदर्शन ने टीम को कठिन परिस्थितियों में भी योजना को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की।

पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी
किले की भव्यता, नर्मदा की लहरों और तकनीक का यह अनूठा संगम महेश्वर पर्यटन को नए आयाम देने जा रहा है। शो के शुरू होने के साथ ही महेश्वर का इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि तकनीक के माध्यम से दर्शकों के सामने नए रूप में प्रस्तुत होगी।

महेश्वर के लिए यह आयोजन एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

23 नवंबर के कार्यक्रम
23 नवंबर को लोकनृत्यों और निमाड़ी काव्य का दौर चलेगा। पुरी का प्रसिद्ध गोटिपुआ नृत्य चंद्रमणि प्रधान एवं साथी, बड़ौदा का राठ नृत्य विजय भाई राठवा एवं साथी, तथा निमाड़ी कवि— मोहन परमार खरगोन, दिलीप काले महेश्वर, राम शर्मा परिंदा मनावर,जितेंद्र यादव कसरावद, धनसिंह सेन जलकोटा और बिहारी पाटीदार करौंदिया—अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री जगदीश जोशीला गोगांव करेंगे।

24 नवंबर को लोकनृत्य श्रृंखला में कथक नृत्य गौरी शर्मा एवं साथी खरगोन, खंडवा का गणगौर अनुजा जोशी एवं साथी और काठी नृत्य रामदास साकल्ले एवं साथी खंडवा प्रस्तुत किया जाएगा। इस दिन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसमें सुदीप भोला, डॉ. शंभूसिंह सिंह मनहर, डॉ भुवन मोहिनी, नरेंद्र श्रीवास्तव ‘अटल’ महेश्वर और राम भदावर ‘ओज’ काव्य पाठ करेंगे। कार्यक्रम के सूत्रधार बुद्धि प्रकाश दाधीच रहेंगे। 

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