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MP के कॉलेज छात्रों के लिए गीता पाठ अनिवार्य, स्वयं पोर्टल से करना होगा नैतिकता का ऑनलाइन कोर्स

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 ग्वालियर
 जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्घता प्राप्त कॉलेजों सहित पूरे प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सभी छात्रों को स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, साथ ही चयनित ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को पूरा करना भी आवश्यक कर दिया गया है।

विभाग ने 6 प्रमुख हिंदी माध्यम के पाठ्यक्रमों की सूची जारी की है, जिनमें श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित एक विशेष कोर्स भी शामिल है। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा द्वारा राज्य के सभी सरकारी, स्वायत्तशासी और निजी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें छात्रों के पंजीयन और ऑनलाइन कोर्स को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई है।

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इस पहल का उद्देश्य छात्रों को बहुआयामी, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा से जोड़ना है। स्वयं पोर्टल के माध्यम से छात्र राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए उच्च गुणवत्ता के अध्ययन सामग्री तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे।
जारी किए गए छह अनिवार्य पाठ्यक्रम

    किशोर स्वास्थ्य
    अपना आहार
    पर्यावरण अध्ययन
    इंडियन नॉलेज सिस्टम
    नैतिकता का परिचय
    श्रीमद्भगवद्गीता : पाठ्य एवं दार्शनिक अन्वेषण

गीता पाठ्यक्रम का उद्देश्य

श्रीमद्भगवद्गीता आधारित कोर्स को आत्मबोध, आत्मचिंतन और जीवन-दर्शन का माध्यम बताते हुए विभाग ने इसे सभी छात्रों के मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए आवश्यक करार दिया है। यह कोर्स छात्रों को धर्म के पार जाकर गहराई से जीवन के मूल्यों को समझने का अवसर देगा।

भारतीय ज्ञान प्रणाली

इस पाठ्यक्रम के जरिये छात्र भारत की पारंपरिक वैज्ञानिक दृष्टि, स्वदेशी नवाचारों और आत्मनिर्भर सोच से परिचित होंगे। यह कोर्स आधुनिक भारत के निर्माण में भारतीय संस्कृति की भूमिका को रेखांकित करेगा।

नई शिक्षा नीति की दिशा में कदम

जेयू के अधिकारियों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने वाला नवाचार है। इससे छात्र न केवल अकादमिक दृष्टि से समृद्ध होंगे बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

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