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इजरायल और ईरान के बीच जंग थमने के बाद से डॉलर लगातार टूट रहा, गिरकर चार साल के निचले स्तर पर आ गया

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वाशिंगटन

बीते सप्ताह तक जब इजरायल और ईरान में जंग (Israel-Iran War) चल रही थी, तो अमेरिकी डॉलर (US Dollar) दहाड़ मारता नजर आ रहा था, लेकिन वॉर थमने के बाद ये अचानक धड़ाम हो गया और टूटते हुए अब चार साल के निचले स्तर पर आ गया है. अमेरिका में महंगाई बढ़ने के साथ ही मंदी की संभावनाओं ने डॉलर को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है, जबकि इसके टूटने से दूसरी करेंसियों Yen और Euro को जबर्दस्त फायदा हुआ है. 

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फिसलकर यहां पहुंचा डॉलर इंडेक्स
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच पिछले सप्ताह तक डॉलर जोरदार तेजी के साथ चढ़ता जा रहा था, लेकिन जैसे ही जंग थमी तो इसमें गिरावट आती चली गई. बीते कारोबारी दिन बुधवार को तो Dollar करीब चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. US Dollar Index (DXY) गिरकर 97.48 पर आ गया है, जो इस साल 10.1% की गिरावट दर्शाता है. डॉलर में गिरावट का सबसे बड़ा लाभार्थी यूरो रहा है और ये 1.1700 डॉलर पर पहुंच गया है. बता दें कि इस साल के शुरुआती महीनों में डॉलर इंडेक्स 109 के पार तक पहुंच गया था.

आखिर क्यों आई डॉलर में गिरावट? 
बात करें, अमेरिकी डॉलर में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में, तो इसकी कई वजह देखने को मिल रही है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक NY ब्रांच में ग्लोबल जी10 एफएक्स रिसर्च और नॉर्थ अमेरिका मैक्रो स्ट्रैटेजी के प्रमुख स्टीव इंग्लैंडर ने कहा है कि बाजार अगले थीम के इंतजार में है और इस साल पॉलिसी रेट में और कटौती की बढ़ती उम्मीदों से डॉलर में कमजोरी आई है.

इसके अलावा US Fed के चीफ जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी कांग्रेस में Donald Trump प्रशासन की टैरिफ नीति से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है. इसके अलावा जेपी मॉर्गन के एनालिस्ट्स ने भी कहा है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियां वैश्विक ग्रोथ में रुकावट पैदा कर सकती हैं और महंगाई में इजाफा देखने को मिल सकता है. एजेंसी ने इसके साथ ही मंदी की 40% संभावना का अनुमान जाहिर किया है. इन सबका सीधा असर डॉलर की वैल्यू पर देखने को मिला है. 

डॉलर फिसला, तो चमक उठीं ये करेंसी
एक ओर जहां डॉलर इंडेक्स फिसला है, तो वहीं इसके दबाव में आने से Euro 0.4% बढ़कर 1.1700 डॉलर पर पहुंच गया है, जो कि इसका सितंबर 2021 के बाद का हाई लेवल है. स्टर्लिंग में 0.3% का उछाल आया और ये जनवरी 2022 के बाद 1.3723 डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया. बात अगर स्विस फ्रैंक की करें, तो इसने डॉलर और येन दोनों पर अच्छी बढ़त हासिल की है. रिपोर्ट के मुताबिक, US Fed की स्वतंत्रता को लेकर उभरी चिंताओं के चलते अमेरिकी डॉलर, यूरो और स्विस फ्रैंक के मुकाबले कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया.

US Fed की स्वतंत्रता की चिंता 
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) की जगह सितंबर या अक्टूबर तक किसी अन्य व्यक्ति को लाने पर विचार किया है. इस बीच इनटच कैपिटल मार्केट्स के एशिया एफएक्स प्रमुख किरन विलियम्स का कहना है कि पॉवेल के उत्तराधिकारी को लेकर होने वाले ऐळान के किसी भी शुरुआती कदम से बाजारों में हलचल मच सकती है, खासकर अगर इसे लेकर होने वाला फैसला राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है.

 सीजफायर से लगातार दूसरे दिन डॉलर के सामने रुपये ने दिखाया दम

ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर की खबर और मीडिल ईस्ट में शांति के बाद एक तरफ जहां वैश्विक शेयर बाजार में शानदार देखी जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ क्रूड ऑयल का भाव भी तेजी के साथ गिरा है. इस बीच अमेरिकी डॉलर के सामने अब भारतीय रुपया अपना दम दिखाने लगा है. बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 13 पैसे मजबूत हुआ. इसके बाद ये 85.92 प्रति डॉलर के लेवल पर पहुंच गया.

रुपये में मजबूती

विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा और विदेशी पूंजी की निकासी ने हालांकि स्थानीय मुद्रा के लाभ को सीमित कर दिया है. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 86.00 प्रति डॉलर पर खुला और उसके बाद फिर 85.92 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 13 पैसे की बढ़त को जाहिर करता है.

एक दिन पहले यानी  रुपया करीब पांच साल में सबसे अधिक एक दिन की बढ़त दर्ज करते हुए 73 पैसे चढ़कर 86.05 पर बंद हुआ था. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 68.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 97.91 पर रहा.

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