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NHAI की बिल्डिंग के उद्घाटन पर केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अधिकारियों को जमकर लगाई लताड़, कहा- 9 साल में बिल्डिंग बनी तो अभिनंदन कैसा, ये तो शर्म की बात

नई दिल्ली
केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह एनएचएआई के वर्क कल्चर पर नाराजगी जताते हुए अफसरों को जमकर फटकार लगा रहे हैं। वीडियो सोमवार का है जब दिल्ली के द्वारका में एनएचएआई (National Highways Authority of India) की नई बिल्डिंग का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन कर रहे थे। अपनी स्पीच में केंद्रीय मंत्री ने बिल्डिंग निर्माण में देरी पर न सिर्फ नाराजगी जताई बल्कि यह भी कहा कि एनएचएआई में सुधार की जरूरत है। उन 'नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स' को बाहर का रास्ता दिखाने की जरूरत है जो चीजों को उलझाते हैं और अड़चने पैदा कर प्रोजेक्ट्स में देरी करते हैं। गडकरी ने कहा कि दो-ढाई सौ करोड़ का काम 9 सालों में पूरा होने पर उन्हें शर्म आती है।

'दो-ढाई सौ करोड़ का काम 9 साल में हुआ, कैसे करूं अभिनंदन?'
गडकरी के तेवर इतने सख्त थे कि उन्होंने अपनी स्पीच की शुरुआत में ही एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, 'ऐसे कार्यक्रम में प्रथा होती है कि कोई भी कार्य पूरा होने के बाद उनका अभिनंदन और शुभेच्छाए देने की प्रथा है। लेकिन मुझे संकोच हो रहा है कि मैं आपका अभिनंदन कैसे करूं क्योंकि 2008 में तय हुआ था कि इस प्रकार से बिल्डिंग बनेगी। 2011 में इसको टेंडर अवॉर्ड हुआ और ये 2 ढाई सौ करोड़ का काम 9 साल बाद आज पूरा हुआ। इस काम को पूरा देखने के लिए 2 सरकारें और 8 चेयरमैन लगे और उसके बाद जाकर यह काम पूरा हुआ तो वर्तमान चेयरमैन और मेंबर बेचारे उनका इस काम से कोई संबंध नहीं है।

'इतनी देरी करने वालों की तो तस्वीर लगनी चाहिए ऑफिस में'
नितिन गडकरी ने बिल्डिंग निर्माण में देरी पर तंज कसते हुए कहा, 'जिन महान हस्तियों ने 2011 से लेकर 2020 तक इस पर काम किया है, उनके लिए संभव हुआ तो चेयरमैन साहब उन सभी सीजीएम और जीएम की फोटो इस ऑफिस में जरूर लगा देना कि जिन्होंने 9 साल तक इस काम को सिर्फ निर्णय न कर पाने के कारण देरी की और जो उन्होंने 9 साल की देरी की तो उनका इतिहास भी सामने आए।'

'अभिनंदन वाली बात कहां है…मुझे तो शर्म आती है'
नितिन गडकरी ने कहा कि उन्हें इतनी देरी को देखकर शर्म आती है। उन्होंने कहा, 'अब हम गौरव से कहते हैं कि दिल्ली-मुंबई हाईवे हम 2 साल में पूरा करेंगे, 80 हजार या 1 लाख करोड़ का काम। 1 लाख करोड़ के काम के लिए अगर 3 साल, साढ़े 3 साल लगेंगे और ये अगर 200 करोड़ के काम के लिए हमने 10 साल लगाए तो कहीं न कहीं ये अभिनंदन करने वाली बात तो नहीं है। मैं आपके लिए तो कुछ कहूंगा नहीं लेकिन मुझे इस बात की शर्म आती है, इतना आपके सामने जरूर कहूंगा।ट

एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
गडकरी ने एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'मैंने इसके लिए 2-3-4 बैठकें की थीं। जब काम फंसा हुआ था तो मुझे भी काफी जानकारी है। और अभी सरकारी पद्धति के अनुसार कॉन्ट्रैक्टर पर ब्लेम डालकर यह एनसीएलटी में गया और एनसीएलटी में जाने के कारण देरी हुआ, ऐसा करके रेकॉर्ड तैयार किया जाएगा।'

'आश्चर्य है, विकृत लोग कैसे बन जाते हैं गाइड और फिलॉस्फर'
गडकरी ने कहा, 'जो विकृत विचार रखने वाले लोग हैं जिन्होंने एनएचएआई में निर्णय नहीं करना और निर्णय करना तो काम करने के बजाय कॉम्प्लिकेशंस पैदा करना…तो ये भी 13-13 साल से 12 साल से चिपके हुए हैं। और मालूम नहीं जो भी चेयरमैन या मेंबर आता है तो उसके गाइड या फिलॉस्फर वही लोग बनते हैं जो पूरी तरह से नेगेटिव हैं और विकृत हैं। उनकी ऑनेस्टी और इंटेग्रिटी पर कोई डाउट नहीं है पर उनकी विचारधारा बिल्कुल विषकन्या जैसी है। ऐसे विकृत लोगों को गाइड और फिलॉस्फर के तौर पर ऊपर से लेकर नीचे तक सभी लोग क्यों यूज करते हैं, इसका मेरे मन में बहुत आश्चर्य लगता है। और यही सीजेएम और जीएम की आपकी जो परंपरा है वह कितनी निकम्मी है और कितना नालायक है इसका उदाहरण इस बिल्डिंग की देरी में हुआ है। इसलिए मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि कम से कम आज ये बिल्डिंग पूरी हुई है तो 11 साल में जिन्होंने हैंडल किया, उसने कितने-कितने साल तक डिसिजन नहीं लिया, रोककर रखा इसका एक रिसर्च पेपर तैयार करके रखिए।'

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