राष्ट्रीय

चीन के किसी भी संभावित घुसपैठ से बचने के लिए भारतीय सेना ने बनाई सुरंगें

 नई दिल्ली 
पूर्वी लद्दाख में महीनों से चल रहे तनावपूर्ण माहौल को शांत करने के लिए भारत-चीन लगातार बैठकें कर रहे हैं तो वहीं, चीनी मीडिया प्रोपेगेंडा फैलाने से भी पीछे नहीं हट रही है। हाल ही में लद्दाख में झड़प के दौरान चीनी मीडिया ने माइक्रोवेव हथियारों के इस्तेमाल की फर्जी कहानी गढ़ी थी। चीन के इतिहास को देखते हुए भारतीय सेना अभी भी कोई कोताही नहीं बरत रही और पूर्वी लद्दाख के डिस-एंगेजमेंट प्रोसेस को बहुत ध्यान से देख रही है। चीन के किसी भी संभावित घुसपैठ से बचने के लिए भारतीय सेना ने सुरंगें बनाई हैं। 

29-30 अगस्त को भारतीय सेना के जवानों ने स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के साथ मिलकर एलओसी पर पैंगोंग सो की दक्षिणी पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। चीन की तमाम कोशिशों को नाकाम करते हुए जवानों ने ऊंचाइयों पर तैनात हो गए थे। वहीं, जब चीनी मीडिया ने प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए माइक्रोवेव हथियारों के इस्तेमाल की फर्जी कहानी बनाई तो उसे फौरन ही भारतीय सेना ने फेक न्यूज भी करार दिया।

चीनी ने दूसरे चीन-जापानी युद्ध में जापानियों के खिलाफ सफलतापूर्वक सुरंग बचाव का इस्तेमाल किया, विएतकोंग ने 1960 के दशक में कोरियाई युद्ध में गुरिल्ला युद्ध और उत्तर कोरियाई में अमेरिकियों के खिलाफ उसी रणनीति का इस्तेमाल किया। पीएलए ने ल्हासा एयर बेस पर हाउस एयरक्राफ्ट और साउथ चाइना सी में हैनान द्वीपों में न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन के लिए अंडरग्राउंड पेन के लिए टनल शेल्टर बनाए हैं।
 
चीनी ने दूसरे चीन-जापानी युद्ध में जापानियों के खिलाफ सफलतापूर्वक टनल डिफेंस का इस्तेमाल किया था। विएत कांग ने 1960 के दशक में कोरियाई युद्ध में उत्तर कोरिया और गुरिल्ला युद्ध में अमेरिकियों के खिलाफ उसी रणनीति का इस्तेमाल किया था। पीएलए ने ल्हासा एयर बेस पर हाउस एयरक्राफ्ट और साउथ चाइना सी में हैनान द्वीपों में न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन के लिए टनल शेल्टर बनाए हैं।

वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के अनुसार, भारतीय सेना ने दुश्मन के हमलों से जवानों को बचाने के लिए सुरंगों के जरिए से शेल्टर्स तक बड़े व्यास वाले कंक्रीट पाइपों को बिछाया है, जिससे हमलों के दौरान दुश्मन देश आश्चर्यचकित हो जाएगा। रिइंफोर्स्ड कंक्रीट पाइप का व्यास (डायमीटर) छह से आठ फीट तक होता है। इसके जरिए से जवान एक जगह से दूसरी जगह पर बिना दुश्मन सैनिक की जद में आए जा सकते हैं। सुरंगों का दूसरा फायदा यह भी होता है कि इन्हें बेहद की ठंडे तापमान के बावजूद भी अंदर से गर्म किया जा सकता है और जवानों के लिए शेल्टर्स का काम कर सकते हैं।

वहीं, दूसरी ओर भारत और चीन के बीच बाकी जगहों से सैनिकों की वापसी को लेकर सैन्य कमांडर स्तर की नौवें दौर की वार्ता होने वाली है। लेकिन, इसके बावजूद भी भारत ने किसी भी घुसपैठ से बचने के लिए पूरी तैयारी की है। 

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close