Home मध्य प्रदेश भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाई...

भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार

4
0
Jeevan Ayurveda

धार 

मध्य प्रदेश के भोजशाला विवाद पर मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एक बेहद अहम मोड़ आया है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एएसआई (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर में कोई भी ढांचागत बदलाव यानि Structural Changes नहीं किया जाएगा. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. इसके अलावा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जहां नमाज को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया, वहीं हाईकोर्ट द्वारा लंदन म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति वापस लाने के आदेश पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के बाद मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, DM और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में अगली सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परिसर में शुक्रवार को नमाज़ पर रोक बरकरार रहेगी. इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार करते हुए कहा कि भोजशाला परिसर के पास नमाज के लिए हर शुक्रवार 1-3 के बीच अलग जगह मुहैया कराया जाए। 

Ad

हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक से इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर परिसर को प्राचीन वागदेवी (मां सरस्वती) मंदिर घोषित करने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतरिम व्यवस्था दी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र, एएसआई, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य हिंदू पार्टियों को नोटिस दिया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शुक्रवार को दिन के 1 बजे से 3 बजे तक नमाज के लिए अलग से जगह की तलाश की जाए।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी भी आदेश से बचने पर जोर दिया, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो या सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।

बहुत ही संवेदनशील मामला
सु्प्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर कहा है कि 'ये बहुत ही संवेदनशील मामले हैं, इस्तेमाल किए जाने वाले हर एक्सप्रेशन के प्रति बहुत ही सावधानी की जरूरत है।'

नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मुस्लिम पक्ष की मांग पर अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा. चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है.CJI सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से भी सवाल किया, "क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए ऐसी अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है." चीफ जस्टिस ने आगे कहा, "हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी. हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है। 

मुस्लिम पक्ष के वकील हुजेफा अहमदी ने बेंच के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. हमें अब परिसर से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है और पिछले 40 साल से जो नमाज निर्बाध रूप से चल रही थी, उस पर भी अचानक रोक लगा दी गई है. सुनवाई के शुरुआत में ही मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि परिसर में पिछले 40 साल पुरानी स्थिति को दोबारा बहाल (Status Quo) किया जाए. इन दलीलों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी करेगा और आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय की जाएगी। 

हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी हैरानी जताई, जिसमें लंदन म्यूजियम से देवी सरस्वती की मूर्ति वापस लाने की बात कही गई थी.बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, "कोई संवैधानिक कोर्ट (Constitutional Court) इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है?

विवाद के समाधान के लिए तैयार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों से कहा कि 'दोनों पक्षों को धैर्य रखना होगा, भोजशाला विवाद के समाधान के लिए रोजाना आधार पर सुनवाई के लिए तैयार हैं।'

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानने और हिंदू समुदाय को विशेष पूजा अधिकार देने का फैसला सुनाया था। जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काजी मोइनुद्दीन की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई। यह मामला डायरी नंबर 32281/2026 के रूप में दर्ज हुआ। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक से इनकार कर दिया।

यह याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के उस फैसले को चुनौती देती है, जो भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद में 15 मई को सुनाया गया था। 

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर माना था। कोर्ट ने कहा था कि हिंदू समुदाय का पूजा का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि परिसर में नमाज की अनुमति देने वाली 7 अप्रैल 2003 की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की व्यवस्था स्थल के मूल स्वरूप के अनुरूप नहीं थी। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देते हुए मुस्लिम समुदाय के लिए अलग स्थान पर मस्जिद निर्माण हेतु वैकल्पिक जमीन देने पर विचार करने की बात कही थी। अदालत ने अपने फैसले में 2024 के पुरातात्विक सर्वेक्षण का भी उल्लेख किया था, जिसमें संस्कृत शिलालेख, हवन कुंड और हिंदू मंदिर वास्तुकला से जुड़े कई प्रमाण मिलने की बात कही गई थी।

फैसले के बाद एएसआई ने 16 मई 2026 को नया आदेश जारी कर हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा और मां सरस्वती से जुड़े अध्ययन कार्यों के लिए बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दी थी। हालांकि, संरक्षित स्मारक होने के कारण प्रशासनिक नियंत्रण एएसआई के पास ही रहेगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह प्रयास करने का भी निर्देश दिया था कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाया जाए।

भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्य भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल 1034 ईस्वी में राजा भोज ने मां सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां सदियों से कमाल मौला मस्जिद मौजूद है और पूर्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं के जरिए इस स्थल की कानूनी स्थिति पहले ही तय की जा चुकी है।

अदालत में मुस्लिम पक्ष की दलीलें
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा, "हम यहां साल 1935 से नमाज पढ़ रहे हैं. इस जगह की अपनी एक खास महत्ता है. शुरुआत में मुस्लिमों ने ही हिंदुओं को यहां जगह दी और उनके लिए व्यवस्था की थी, लेकिन अब हमें ही यहां से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है."सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंघवी ने हाईकोर्ट के फैसले के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, "मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपना आदेश इस तरह से पारित किया कि मेरे पास कोई मौका ही नहीं बचा और रातों-रात 40 साल से चली आ रही यथास्थिति (Status Quo) बदल गई, क्योंकि अगला दिन शनिवार का था। 

सभी याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई
इससे पहले मुस्लिम पक्ष के वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से यह मांग की थी कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी केवल एक याचिका कल सुनवाई के लिए लिस्ट हुई थी, इसलिए बाकी की अन्य याचिकाओं को भी आज एक साथ सुना जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील हुजैफा अहमदी को भरोसा दिलाया था कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जा सकती है। 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here