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अमेरिका-ईरान जंग फिर भड़की: 300 ठिकानों पर हमले, होर्मुज बंद होने से दुनिया पर तेल संकट का खतरा

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नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव शुरू हो गया है. पिछले तीन दिन में ईरान ने अमेरिका का 6 बेस पर हमला किया तो अमेरिका ने तीन रातों में 300 टारगेट्स को निशाना बनाया. सीजफायर अब खत्म हो चुका है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी है. अमेरिका ने इसके जवाब में ईरान के सैकड़ों ठिकानों पर हमले किए हैं.

इस संघर्ष में दोनों तरफ से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं, जिसमें अमेरिकी बेसेस पर ईरानी मिसाइल हमले और अमेरिकी हमलों में ईरानी तटवर्ती इलाकों में विस्फोट शामिल हैं. इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है. दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

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फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से कई बार युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन वे टिक नहीं पाईं. हाल ही में एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसमें ईरान को कुछ छूट दी गई थी. लेकिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की.

जब कुछ जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और निर्धारित रूट से हट गए, तो ईरानी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने उन पर हमला कर दिया. एक साइप्रस-ध्वज वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy को नुकसान पहुंचा, एक क्रू मेंबर लापता है. जहाज में आग लग गई. ईरान का कहना है कि यह चेतावनी का गोला था, लेकिन अमेरिका इसे साफ हमला मानता है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान पर जवाबी कार्रवाई शुरू की. तीन रातों में 300 से ज्यादा ईरानी ठिकानों – मिसाइल साइट्स, ड्रोन बेस, नौसैनिक सुविधाएं, गोला-बारूद स्टोर और संचार नेटवर्क – को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, सिरिक, क़ेश्म द्वीप, बुशहर और जास्क जैसे इलाकों में विस्फोटों की खबर दी. इस हमले के बाद ईरान ने जवाब दिया.

ईरान की जवाबी कार्रवाई: क्षेत्रीय बेस पर हमले
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जवाब दिया. सबसे महत्वपूर्ण हमला जॉर्डन के मुवाफक सल्ती एयर बेस पर हुआ, जहां अमेरिकी F-35 विमान तैनात हैं. यह बेस पूरे युद्ध में ईरानी मिसाइलों से बचता रहा था, लेकिन इस बार सायरन बज गए और कुछ मिसाइलें लक्ष्य के करीब पहुंचीं.

IRGC का दावा है कि उन्होंने प्रिंस हसन एयर बेस पर कमांड सेंटर और MQ-9 रीपर ड्रोन हैंगरों को नष्ट कर दिया. इसके अलावा ईरान ने बहरीन में अमेरिकी 5वीं फ्लीट मुख्यालय, कुवैत, जॉर्डन, कतर, बहरीन, UAE और ओमान में अमेरिकी बेस पर हमले किए. बहरीन में धुआं उठता दिखा, जो ईरानी हमले की पुष्टि करता है.

ओमान में पेंटागन रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भी सरप्राइज अटैक की खबर है. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका के तीसरे हमले के जवाब में था. ईरानी वायुसेना अब हवा में एक्टिव है. तेहरान के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम चालू हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक अर्थव्यवस्था का गला
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. ईरान ने इसे बंद कर दिया है. कहा है कि जब तक 'ईरानी व्यवस्था' नहीं बनेगी, यह खुला नहीं रहेगा. ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है. दक्षिणी रूट (ओमान के पानी) को अमेरिका बढ़ावा दे रहा है.

इस बंद से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, हालांकि तेल की कीमतें पहले के 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से कुछ कम हुई हैं. ईरान का मानना है कि वह इस युद्ध से क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उभरा है. अमेरिका और इजराइल के मुख्य लक्ष्य पूरे नहीं हुए, इसलिए तेहरान लंबी खेल खेल रहा है.

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि हॉर्मुज केवल 'ईरानी व्यवस्था' के साथ खुलेगा. संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ भी इसी रुख पर हैं.

अमेरिका की रणनीति और ट्रंप प्रशासन
अमेरिका का कहना है कि वह नागरिक जहाजों की आजादी सुनिश्चित करने के लिए ईरान की क्षमता को कमजोर कर रहा है. डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने गलत चुनाव किया, अब उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी. अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री पर छूट वापस ले ली है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर और हमलों की धमकी दी है.

ओमान के साथ ईरान की बैठक हुई थी, जिसमें सुरक्षित जहाज आवागमन पर बातचीत हुई. लेकिन अमेरिका इसे पर्याप्त नहीं मानता. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि केवल आपसी सामंजस्य ही काम कर सकता है.

क्षेत्रीय प्रभाव और चुनौतियां
इस टकराव से खाड़ी के राजशाही देशों पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान क्षेत्रीय वर्चस्व चाहता है, जिसे 'पैक्स इरानिका' कहा जा रहा है. लेकिन अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है. फिर भी ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की शपथ ली है.

जॉर्डन जैसे देश बीच में फंस गए हैं. जॉर्डन ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है. बहरीन, कुवैत, UAE और कतर में अमेरिकी बेसेस होने से ये देश भी लक्ष्य बन सकते हैं.

वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने से महंगाई बढ़ सकती है. चीन और भारत जैसे आयातक देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. अगर यह संघर्ष लंबा चला तो समुद्री व्यापार रुक सकता है. बीमा लागत

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