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किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा तोहफा: खरीफ फसलों की MSP बढ़ी, धान अब ₹2441 प्रति क्विंटल

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नई दिल्ली
 केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हेतु 2.60 लाख करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद किसानों को मजबूत आय सहायता देना है। MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी।

सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों का MSP बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। 

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धान समेत अन्य फसलों की नई MSP
सरकार ने बुधवार को 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।पिछले वर्ष की तुलना में MSP में सबसे अधिक वृद्धि की सिफारिश सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, जिसके बाद कपास (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजर बीज (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (₹500 प्रति क्विंटल) का स्थान है।

आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने की उम्मीद है, जबकि सालाना खरीद 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी बताया कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा है, जो 2019 में शुरू की गई उस नीति को जारी रखता है जिसका मकसद किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है।

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस संबंध में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में एक फैसला लिया गया।

2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीज़न (सितंबर-अक्टूबर) के लिए, सामान्य और 'A-ग्रेड' किस्मों का समर्थन मूल्य 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर क्रमशः 2,441 रुपये और 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद भारत की आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही घरेलू कोयला भंडारों का ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से इस्तेमाल करना है।

इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, और यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

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