मध्य प्रदेशराज्य

8 लाख 73 हजार आवेदन, कर्ज मिला 1 लाख 14 हजार को, चार लाख अयोग्य

भोपाल
कोरोना महामारी के बाद बेरोजगार हुए पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर) के जीवन की गाड़ी को वापस पटरी पर लाने के लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की बिना ब्याज के दस हजार के कर्ज की योजना को मध्यप्रदेश के पथ विक्रेताओं ने सर्वाधिक पसंद किया। योजना का लाभ लेने 8 लाख 73 हजार लोगों ने आवेदन भी किए लेकिन योजना अफसरशाही की भेंट चढ़ गई। इनमें से केवल 1 लाख 14 हजार लोगों को ही बैंक से कर्ज मिल पाया है। उल्टे निकायों के अफसरों और बैंको ने मिलकर 4 लाख 16 हजार पथविक्रेताओं को इस योजना के लिए अयोग्य ठहराते हुए उनके आवेदन निरस्त कर दिए है।

इस योजना के तहत फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले, हाथठेले, सायकल से फेरी लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले छोटे कारोबारियों, व्यवसाईयों को कोरोना लॉकडाउन के दौरान उनके कारोबार बंद रहने से बेपटरी हुई उनकी आजीविका के साधन को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना शुरु की गई थी।इस योजना के तहत पथ विक्रेताओं को दस हजार रुपए का कर्ज सरकार बैंको के जरिए उपलब्ध करा रही है और इसके ब्याज की अदायगी सरकार खुद करेगी।

मध्यप्रदेश में इस योजना को अच्छा प्रतिसाद मिला। 378  नगरीय निकायों के 8 लाख 73 हजार पथ विक्रेताओं ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर पंजीयन कराया। निकायों के अफसरों ने 4 लाख 53 हजार हितग्राहियों को भौतिक सत्यापन किया और  4 लाख 19 हजार आवेदकों को योजना के लिए अपात्र बताते हुए उनके आवेदन ही निरस्त कर दिए।  2 लाख 16 हजार हितग्राहियों को पहचान पत्र और विक्रय प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

इंदौर नगर निगम में 59 हजार 672, भोपाल में 33 हजार 728, ग्वालियर में 19 हजार 62, जबलपुर में 16 हजार 105, उज्जैन में 8 हजार 720 प्रकरण लंबित है। वहीं नगर पालिकाओं में भिंड में 4 हजार 220, शिवपुरी में 3 हजार 411, विदिशा में 3 हजार 196, पीथमपुर में 2 हजार 518 और नीमच में 2 हजार 444 आवेदन लंबित चल रहे है।

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