मध्य प्रदेशराज्य

5 साल पहले कैबिनेट की मंजूरी पर मछली घर बनाने अब तक नहीं मिले 50 करोड़

भोपाल
तकरीबन 5 साल पूर्व मिंटो हाल से भदभदा रोड पर विस्थापित किए गए एशिया के सबसे बड़े मछली घर को अभी तक स्वयं का भवन नसीब नहीं हो पाया है। जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के तीसरे कार्यकाल में इस भवन को बनाने के लिए 50 करोड़ की धनराशि मंत्री परिषद की बैठक में मंजूर हुई थी।दुर्भाग्य देखें की आज तक यह भवन निर्माण कराने के लिए फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। बताना होगा कि वर्ष 2015 में राज्य सरकार द्वारा मिंटो हाल में करीब 4 दशकों से संचालित होते रहे मछली घर को भदभदा रोड स्थित मत्स्य विभाग के संचालन में शिफ्ट किया था। मछली घर विस्थापित होने के अगले ही महीने राज्य सरकार ने अपनी कैबिनेट में नया मछलीघर भवन बनाने के लिए बाकायदा ₹50 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की थी। उस समय के मंत्री अंतर सिंह आर्य ने भी दावा किया था कि यह मछली घर निर्धारित समय सीमा में बनकर तैयार होगा।

उन्होंने यह भी कहा था कि भवन बनाने के लिए प्रथम चरण में ₹20 करोड़ की धनराशि अधिकारियों को दी जाएगी। इसके बाद शेष राशि का भुगतान होगा। अब अधिकारियों का कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भी आज तक फूटी कौड़ी भी सरकार द्वारा नहीं दी गई है।ऑस्ट्रेलिया अमेरिका लंदन से मांगी गई थी डिजाइनबताना होगा कि कैबिनेट में ही राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि भोपाल में भदभदा रोड पर विस्थापित किए गए इस मछली घर को विश्व स्तरीय बनाया जाएगा। ताकि देश के कोने.कोने से यहां पर पर्यटक भ्रमण करने आ सके। इसके लिए बाकायदा ऐपको द्वारा डिजाइन तैयार की गई थी। यह डिजाइन भी ऑस्ट्रेलिया अमेरिका और लंदन जैसे देशों के मछली घरों का अवलोकन करने के बाद तैयार हुई थी। यह डिजाइन पिछले 2 साल से मंत्रालय में पड़ी है जिसे अभी तक स्वीकृति ही नहीं मिल पाई है। इधर केबिनेट का निर्णय होने के बाद अधिकारियों का दावा था कि अधिकतम 18 माह की अवधि में यह भवन तैयार होगा। क्योंकि यह निर्णय होते ही बाकायदा मत्स्य संचालनालय के ठीक बाजू में 4 एकड़ जमीन भी आरक्षित कर ली गई थी। उसके बाद भी अभी तक काम शुरू ना होना साफ दर्शा रहा है कि सिस्टम की इस दशा में बड़ी लापरवाही है।

मिंटो हाल में था एशिया का सबसे बड़ा मछली घरबताना होगा कि मिंटो हाल में एशिया का सबसे बड़ा मछली घर था। यहां की डिजाइन का अवलोकन करकेत ही जम्मू कश्मीर हिमाचल यहां तक कि श्रीलंका की सरकारों ने भी अपने यहां पर मछली घरों के निर्माण करवाए हैं। बेल्जियम गिलास से सुसज्जित इस मछली घर के विस्थापन होने के बाद पूरा पर्यटन उद्योग एक प्रकार से चौपट हो गया है। अधिकारियों की माने तो जब से भदभदा रोड पर संचालनालय की बिल्डिंग में मछली घर शिफ्ट हुआ है तब से पर्यटन उद्योग आधा रह गया है। सिर्फ एक गैलरी में एक्वेरियम रखे हुए हैं। जबकि विभिन्न देशों और प्रदेशों की अनेक प्रजातियों की मछलियां मिंटो हाल एकबेरियम मैं रहा करती थी। जगह की कमी होने के कारण यहां पर सैलानियों का रुझान लगातार घटा है।

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