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नासा मिशन: शुभांशु शुक्ला और टीम अंतरिक्ष से क्या लेकर लौटेंगे, हुआ खुलासा

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वॉशिंगटन
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनके क्रू मेंबर्स आज आज धरती पर वापस लौट रहे हैं। यह लोग अंतरिक्ष में करीब 18 दिन बिताने के बाद लौट रहे हैं। यह लोग अपने साथ ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में कुछ जरूरी डेटा और सामान लेकर आएंगे। एक्सिओम मिशन 4 क्रू मेंबर्स सोमवार को ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को अलविदा बोल चुके हैं। यह लोग अब धरती पर पहुंचने के बेहद करीब हैं। अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी से पहले नासा ने बताया कि यह लोग अपने साथ क्या-क्या लेकर आ रहे हैं।

एक्सपेरिमेंट का डेटा
नासा ने बताया कि एक्सिओम मिशन-4 पर गए अंतरिक्ष यात्री अपने साथ करीब 580 पाउंड सामान ला रहे हैं। इसमें नासा का हार्डवेयर और डेटा है। यह डेटा उन 60 से ज्यादा एक्सपेरिमेंट्स का है जो मिशन के दौरान इन अंतरिक्ष यात्रियों ने अंजाम दिया। ड्रैगन अंतरिक्ष यान और एक्सिओम स्पेस एएक्स-4 के सभी सदस्य मंगलवार को भारतीय समयानुसार अपराह्न तीन बजकर एक मिनट पर पृथ्वी के वाायुमंडल में फिर से प्रवेश करेंगे। यह लोग सैन डिएगो तट पर पानी में उतरेंगे। बता दें कि यात्रा पर रवाना होने से पहले एक्सिओम मिशन-4 कई बार स्थगित हुआ था। इसके बाद 25 जून को यह स्पेसक्राफ्ट फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुआ। यह निजी अंतरिक्ष मिशन, भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए काफी अहमियत रखने वाला है।

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किया जाएगा डी-ऑर्बिट बर्न
अंतरिक्ष यान के पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करते ही भारतीय समयानुसार आज अपराह्न दो बजकर सात मिनट पर प्रशांत महासागर के ऊपर ‘डी-ऑर्बिट बर्न’ होने की उम्मीद है। जब कोई अंतरिक्ष यान पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा होता है और उसे वापस धरती पर लाना होता है, तो उसकी गति को कम करना आवश्यक होता है ताकि वह कक्षा से बाहर निकलकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सके। इसी गति को कम करने के लिए अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर्स (छोटे इंजन) को एक निश्चित समय और दिशा में दागा जाता है। इस प्रक्रिया को ही ‘डी-ऑर्बिट बर्न’ कहते हैं।

रिकवरी जहाज पर जाएंगे अंतरिक्ष यात्री
अंतिम तैयारियों में कैप्सूल के ट्रंक को अलग करना और वायुमंडल में प्रवेश से पहले ‘हीट शील्ड’ को अनुकूलित करना शामिल है, जिससे अंतरिक्ष यान लगभग 1,600 डिग्री सेल्सियस तापमान के संपर्क में आएगा। पैराशूट दो चरण में तैनात किए जाएंगे- पहले लगभग 5.7 किमी की ऊंचाई पर स्थिरीकरण पैराशूट, उसके बाद लगभग दो किमी की ऊंचाई पर मुख्य पैराशूट। अंतरिक्ष यान को एक विशेष रिकवरी जहाज पर उतारा जाएगा, जहां से अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से बाहर निकाला जाएगा।

सात दिन का होगा पुनर्वास
एक्सिओम-4 के चालक दल की जहाज पर ही कई चिकित्सीय जांच की जाएंगी। इसके बाद वे तट पर आने के लिए एक हेलिकॉप्टर में सवार होंगे। चारों अंतरिक्ष यात्रियों को पुनर्वास में सात दिन बिताने पड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में अनुभव की जाने वाली भारहीनता के विपरीत, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पृथ्वी पर जीवन के लिए खुद को ढालना होगा।

 

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