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यूपी मिशन-2024 के लिए बीजेपी ने बिछाई नई बिसात, ओबीसी ही क्यों एजेंडे पर

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लखनऊ

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन में बदलाव कर करीब 19 महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। पार्टी के महामंत्री संगठन के पद पर बदलाव तो काफी वक्त से प्रतीक्षित था लेकिन इसी के साथ पार्टी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद को परिषद में नेता सदन बनाकर कई संदेश दे दिए हैं। वहीं स्वतंत्र देव सिंह को कैबिनेट मंत्री तक सीमित कर संदेश देने का प्रयास किया गया है। दरअसल, पार्टी इसके जरिये संगठन और सरकार में एक अलग सा संतुलन भी बिठाना चाहता है। वहीं यह माना जा रहा है ओबीसी ही एजेंडे पर रहेगा।

संगठन महामंत्री सुनील बंसल मिशन-2024 तक प्रदेश में रहेंगे या जाएंगे। इसे लेकर चर्चाएं जोरों पर थीं। पार्टी का एक धड़ा मान रहा था कि वह लोकसभा चुनावों तक यहीं रहेंगे और उसके बाद पार्टी उन्हें अन्यत्र समायोजित करेगी। लेकिन हुआ इससे इतर। दरअसल, सुनील बंसल के रहते संगठन और सरकार में सामंजस्य को लेकर कोई सवाल नहीं था लेकिन वक्त-वक्त पर पार्टी में अंदरखाने चर्चाएं रहतीं कि कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं हैं। वहीं कुछ अन्य बातें भी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचती रहीं। नतीजतन, संघ की ओर से उन्हें बदलने का फैसला किया जा चुका था। अब नए संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के जरिये भी पार्टी ने पश्चिमी यूपी के साथ ही ओबीसी वर्ग को ही संदेश देने का प्रयास किया है।

 मिशन-2024 में ये हैं एजेंडे पर
यही नहीं पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य का कद बढ़ा कर मिशन-2024 के लिए संकेत दे दिए हैं कि पार्टी के लिए ओबीसी ही मुख्य रूप से एजेंडें में हैं और रहेंगे। दरअसल, पार्टी में हमेशा ऐसा होता रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष सरकार का मुख्यमंत्री दोनों ही एक मजबूत किरदार के रूप में कार्य करते रहे हैं। मसलन, जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रहे तो प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कद्दावर नेता के रूप में राजनाथ सिंह और कलराज मिश्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के मंत्री बनने के बाद से ऐसी स्थिति सामने नहीं दिख रही थी। यह नहीं पार्टी को एक कुर्मी नेता के रूप में प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का भी बहुत लाभ नहीं मिलने की बात सामने आई। बीते विधानसभा चुनावों में कुर्मी वोट बैंक के पार्टी से कुछ जिलों में छिटकने और सपा के पाले में जाने के मुद्दे पर भी नेतृत्व चिंतित था। यही वजह रही कि पार्टी ने केशव को जिम्मेदारी देने का फैसला किया। इस फैसले को भी मिशन-2024 से जोड़कर देखा जा रहा है।

मिशन 2017 बड़ी वजह
दरअसल, पार्टी नेतृत्व का मानना रहा है कि केशव में नेतृत्व व संगठन की सटीक क्षमता रही है। उन्होंने मिशन-2017 के दौरान इसका परिचय भी दिया था। अब पार्टी को कुछ ही दिनों में नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा। पार्टी की कोशिश है कि इस पद पर किसी कद्दावर ओबीसी या फिर दलित चेहरे को बिठाया जाए ताकि लोकसभा चुनावों में उनके जरिये कार्यकर्ताओं और आम जनमानस को और अधिक जोश के साथ सक्रिय किया जा सके।

 

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