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2031 में बढ़ जाएगी बिजली की डिमांड, तैयारियों में जुटीं एनर्जी एजेंसियां

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भोपाल
मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ती डिमांड के चलते बिजली की खपता वर्ष 2031 में साढ़े हजार मेगावाट से अधिक बढ़ जाएगी। इसे देखते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी को टीईआरआई (द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट) के साथ इसके वास्तविक आकलन कराने और डिमांड के हिसाब से सप्लाई की व्यवस्था के लिए काम करने को कहा है। एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी ने भी इसको लेकर अपने स्तर पर आकलन रिपोर्ट तैयार की है। बदलते वक्त और ऊर्जा स्त्रोतों के अधिकतम उपयोग को देखते हुए केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा राज्य में संभावित दीर्घकालीन मांग का आंकलन किया गया है।

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के प्रस्ताव के बाद टीईआरआई को भी विभाग द्वारा दीर्घकालीन आधार पर विद्युत की मांग एवं उपलब्धता का आंकलन करने के लिए कहा गया है। इस बीच एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य में दीर्घकालीन मांग एवं आपूर्ति का आंकलन किया गया है। आंकलन के अनुसार उच्चतम मांग की अवधि के दौरान विद्युत उपलब्धता में कमी वर्ष 2027-28 से अपेक्षित पाई गई है। यह वर्ष 2028-29 के लिए 1228 मेगावॉट, वर्ष 2029-30 के लिए 2503 मेगावॉट, वर्ष 2030-31 के लिए 3781 मेगावॉट और वर्ष 2031-32 के लिए 4658 मेगावॉट आंकलित की गई है।

इसके बाद एमपी पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा भारत सरकार के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एक संयुक्त उपक्रम का गठन कर अमरकंटक ताप विद्युत गृह में 660 मेगावॉट क्षमता की नई इकाई की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही सतपुडा ताप विद्युत गृह सारनी में 660 मेगावाट क्षमता की इकाई की स्थापना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे राज्य में विद्युत की मांग अनुरूप पूर्ति की जा सकेगी।

विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष भी वर्ष 2030 तक की विद्युत प्रदाय योजना पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया है। गौरतलब है कि भविष्य में नियामक आयोग द्वारा वितरण कंपनियों के आरपीओ दायित्वों में बढ़ोतरी संभावित है जिसके परिपालन से अतिरिक्त नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध होगी। साथ ही शासन की कुसुम योजना के क्रियान्वयन से कृषि आधारित मांग के लिए सौर ऊर्जा कृषकों को उपलब्ध होगी। अतिरिक्त विद्युत उपलब्धता से आंकलित मांग और उपलब्धता का अंतर कम होना संभावित है।

वितरण कंपनियों का संगठनात्मक ढांचा होगा संशोधित
विद्युत वितरण कंपनियों की अधोसंरचना में विगत समय में हुई काफी वृद्धि के आधार पर वितरण कंपनियों की संगठनात्मक संरचना को संशोधित किया जाना प्रक्रियाधीन है। इसके साथ ही, वितरण कंपनियों द्वारा वर्तमान में आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से भी पर्याप्त संख्या में लाईनमेनों की फील्ड में तैनाती सुनिश्चित की जा रही है।

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