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मंत्रियों के लापरवाही पर बीजेपी संगठन सख्त, अब हार वाले जिलों पर फोकस

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भोपाल
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के बाद नगरपालिका और नगर परिषदों में अध्यक्ष बनाने में जुटी बीजेपी ने मंत्रियों के प्रभार वाले उन जिलों में ज्यादा फोकस किया है जहां मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव बीजेपी हार गई है। इन मंत्रियों को ताकीद किया गया है कि नगर निगम परिषद अध्यक्ष, नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पदों पर बीजेपी पार्षदों का निर्वाचन कराने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हार वाले जिलों के दर्जन भर प्रभारी मंत्रियों के साथ अन्य जिलों में भी पार्षदों को साथ रखने और बगावत की स्थिति से दूर रखने की जिम्मेदारी पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों के साथ मंत्रियों को सौंपी गई है। पिछले चुनावों में अपनों को जिताने के लिए संगठन कैंडिडेट की अनदेखी अब आगे भारी न पड़े, इसके लिए मंत्रियों ने स्थानीय नेताओं के जरिये संवाद और संपर्क तेज कर दिया है।

शिवराज सरकार के 12 मंत्रियों का जिला पंचायत अध्यक्ष और महापौर के चुनाव में पुअर परफार्मेंस अब आने वाले दिनों में नगरपालिका व नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव के जरिये उनके लिए चुनौती बना है। संगठन ने इन मंत्रियों को नपा अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव में किसी तरह की कसर बाकी नहीं रखने के लिए चेताया है। प्रभार के जिले में मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष न बनवा पाने वाले प्रभारी मंत्रियों में बृजेन्द्र प्रताप सिंह, बिसाहूलाल सिंह, मीना सिंह, गोपाल भार्गव, तुलसीराम सिलावट, यशोधरा राजे सिंधिया, इंदर परमार, डॉ मोहन यादव, गोविन्द राजपूत, हरदीप डंग जगदीश देवड़ा, भारत सिंह कुशवाह के नाम शामिल हैं।

बृजेन्द्र प्रताप, मोहन यादव ने प्रभार के जिले को छोड़ा रामभरोसे
संगठन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर पाने के मामले में जिन मंत्रियों की पुअर परफार्मेंस सामने आई है, उनमें मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ मोहन यादव, बिसाहूलाल सिंह टॉप पर हैं। तीनों ही मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा को नहीं मिला है। खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के प्रभार के जिले सिंगरौली में मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष व नर्मदापुरम में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद भाजपा ने खोया है। सिंगरौली में सबसे बुरी स्थिति में भाजपा है जहां महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष दोनों ही आप और कांग्रेस के कब्जे में गए हैं। उधर, उच्च शिक्षा मंत्री मोहन के प्रभार के जिले राजगढ़ और डिंडोरी में बीजेपी के जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बने हैं। उज्जैन में मेयर के चुनाव में भी उनके क्षेत्र से बीजेपी का परफार्मेंस बहुत अच्छा नहीं रहा है। इन जिलों में मंत्री, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय में कमी के चलते निकाय चुनाव में वोटर्स को बीजेपी के पक्ष में ला पाने में नाकाम रहे।

तुलसी सिलावट के लिए ग्वालियर बना चुनौती
बीजेपी ग्वालियर में मेयर का चुनाव हार गई है और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट यहां के प्रभारी मंत्री हैं। सिलावट के साथ मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का भी ग्वालियर महापौर और पार्षद चुनाव में अहम रोल था लेकिन महापौर का चुनाव हारी भाजपा अपेक्षित पार्षद संख्या भी नगर निकाय चुनाव में नहीं जुटा पाई। इसका नतीजा यह है कि अब निर्दलीय पार्षदों को बीजेपी में शामिल कराना पड़ रहा है और कांग्रेस पार्षदों को तोड़ने की कवायद जारी है। ग्वालियर नगर निगम सभापति चुनाव और वहां के नगरपालिका चुनाव में अब सिलावट को संगठन की कसौटी पर खरे उतरकर बताना होगा।

गोविन्द राजपूत, मीना और बिसाहू अपनों के लिए जुटे, पार्टी लाइन दरकिनार
दमोह के प्रभारी मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, अनूपपुर की प्रभारी मंत्री मीना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए लॉबिंग करने में नाकाम रहे और पार्टी को नुकसान हुआ है। दमोह में तो सब कुछ भाजपा के पक्ष में था लेकिन आपसी समन्वय की कमी ने नुकसान की स्थिति में ला दिया। इसी तरह अनूपपुर में मीना सिंह जिला पंचायत सदस्यों के साथ संवाद और समन्वय बनाने में नाकाम रही हैं। मंत्री बिसाहूलाल सिंह के प्रभार के जिले रीवा में मेयर कांग्रेस को गया है और बिसाहूलाल अपने बेटे व बहू को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जिताने में व्यस्त रहे। बीजेपी संगठन ने इसे गंभीरता से लिया है।

यहां जीते जिला पंचायत अध्यक्ष लेकिन नपा-नगर परिषद अध्यक्ष भी चाहिए
पंचायत चुनाव में बीजेपी समर्थित जिला पंचायत सदस्य जिन जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने में सफल हुए हैं, उनमें भोपाल, मंदसौर, कटनी, दतिया, मुरैना, नरसिंहपुर, शहडोल, सागर, ग्वालियर, गुना, भिंड, शिवपुरी, बुरहानपुर, शाजापुर, मंडला, रायसेन, सीहोर, पन्ना, टीकमगढ़, रीवा, बड़वानी, निवाड़ी, विदिशा, सतना, उज्जैन, आगर, बैतूल, अशोकनगर, धार, खरगोन, उमरिया, खंडवा, इंदौर, नीमच, सिवनी, श्योपुर, छतरपुर, जबलपुर, अलीराजपुर, नरसिंहपुर और हरदा शामिल हैं। इन जिलों में अब नगर निगम सभापति और नगरपालिका व नगर परिषद में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का पद हासिल करना पार्टी की प्राथमिकता में शामिल है और इन जिलों के प्रभारी मंत्रियों को भी इस पर खरा उतरकर बताना होगा।

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