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किन्नर महामंडलेश्वर ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग का जलाभिषेक‍ करने पहुंचीं, कहा- मैं अर्धनारीश्वर शिवलिंग का जलाभिषेक करूंगी

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जबलपुर
पशुपतिनाथ अखाड़े की किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी आज सुबह यहां नर्मदा नदी के किनारे ग्वारीघाट पहुंचीं। उन्होंने कहा, मैं अर्धनारीश्वर होते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करूंगी, क्योंकि भगवान शिव भी अर्धनारीश्वर का ही स्वरूप हैं। सनातन धर्म के संत काशी विश्वेश्वर में नर्मदा नदी के जल से अभिषेक करना चाहते हैं। इस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। पूरा महीना सावन महीना खत्म होने जा रहा है। उन्होंने कहा, एक अर्धनारीश्वर दूसरे नारीश्वर को जल चढ़ाने जा रही है।

मालूम हो कि किन्नर महामंडलेश्वर ने यहां ऐलान किया था कि वे 8 अगस्त को बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग में जलाभिषेक करने के लिए जाएंगी। हिमांगी सखी को प्रथम किन्नर भागवताचार्य का सम्मान भी प्राप्त है। उन्होंने कहा, श्रावण मास समाप्त होने को है और इसका आखिरी सोमवार आने को है और अब तक बनारस में ज्ञानवापी में महादेव में जलाभिषेक करने की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए अब वे नहीं रुकेंगी और यहां से जल लेकर वहां जाएंगी। जानकारी हो किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने कहा कि सावन का महीना अर्धनारीश्वर देवाधिदेव महादेव का होता है। ऐसे में इस पवित्र महीने में वो आठ अगस्त को बनारस स्थित विश्वेश्वर ज्ञानवापी महादेव का जलाभिषेक करने हर हाल में जाएंगी। भले ही इसके लिए उनको जेल जाना पड़े या उनकी जान चली जाए।

किन्नर साथियों और संतों को लेकर जाएंगी बनारस
मालूम हो कि वहीं हिमांगी सखी ने कहा कि वे जबलपुर से करीब दो दर्जन किन्नर-साथियों और अन्य संतों के साथ बनारस के लिए रवाना होंगी। इस मौके पर सावन माह के अंतिम सोमवार के दिन वृंदावन से भी 800 संत वाराणसी पहुंचेंगे। हम सभी लोग बनारस के गंगाघाट से गंगाजल लेकर कांवड़-यात्रा के रूप में विश्वेश्वर ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग का जलाभिषेक‍ करने जाएंगे।

पशुपतिनाथ पीठ से मिली उपाधि
मालूम हो कि हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि पशुपतिनाथ पीठ अखाड़े से मिली है। यह अखाड़ा नेपाल में है। 2019 में प्रयागराज में हुए कुंभ में नेपाल के गोदावरी धाम स्थित आदिशंकर कैलाश पीठ के आचार्य गौरीशंकर महाराज ने उन्हें पशुपतिनाथ पीठ की महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी । अब तक महामंडलेश्वर हिमांगी सखी बैंकाक, सिंगापुर, मारीशस सहित अनेक स्थानों पर 50 से अधिक भागवत कथाएं कर चुकी हैं।

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