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हैदराबाद की 54% आबादी में मिली कोविड के खिलाफ ऐंटीबॉडी, 75% को कोरोना संक्रमण का पता ही नहीं चला: सर्वे 

हैदराबाद
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 54 फीसदी लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई है। शहर में आईसीएमआर की ओर से कराए गए एक सीरोप्रीवेलेंस सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे में बताया गया है कि तकरीबन 54 फीसदी आबादी में सार्स-कॉव-2 के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं, जो यह संकेत है कि इन लोगों में कोरोना का संक्रमण हुआ था। सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि हैदराबाद में 75 फीसदी सीरोपॉजिटिव लोगों को पता ही नहीं चला कि वह कोरोना के संक्रमण में आए थे। आईसीएमआर के अलावा सीएसआईआर, सीसीएमबी, एनआईएन और भारत बायोटेक भी इस सर्वे को कराने वालों में शामिल थे। इसका मुख्य मकसद कोरोना वायरस के खिलाफ विकसित एंटीबॉडी का अनुमान लगाना था। वैज्ञानिकों ने सर्वे के लिए तकरीबन 9 हजार सैंपल्स लिए थे। शहर के 30 वॉर्डों के लोगों के नमूने इस सर्वे में शामिल किए गए थे। इनमें हर वॉर्ड से कम से कम 300 लोगों को लिया गया था। शोध में तकरीबन सभी सैंपल्स 10 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों से ही लिए गए थे।

ज्यादातर वॉर्ड्स में सीरोप्रीवेलेंस की 50-60 फीसदी की एकसमान रेंज ही दिखाई दी। हालांकि, कुछ वॉर्ड्स में यह आंकड़ा 70 फीसदी और 30 फीसदी तक भी रहा। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में सीरोपॉजिटिविटी की दर ज्यादा था। महिलाओं में जहां यह दर 56 फीसदी थी, तो वहीं पुरुषों में यह दर 53 फीसदी थी। 70 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों में सीरोपॉजिटिविटी सबसे कम थी। इसका प्रमुख कारण यह माना जा रहा है कि बुजुर्गों में महामारी के दौरान सीमित गतिशीलता रही और उनकी देखभाल पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। जिन लोगों के घरों में कोरोना के मामले सामने आए थे, उनमें से 78 फीसदी लोगों में सीरोपॉजिटिविटी देखी गई। सीसीएमबी के डायरेक्टर डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि यह सर्वे बताता है कि हैदराबाद संभवतः धीरे-धीरे हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया से इसमें तेजी आएगी।
 

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