उत्तर प्रदेशराज्य

हाथरस केस के पीड़ित परिवार के सामने कई समस्याएं खड़ी, कर्ज, रोजगार व पशुओं के चारे की चिंता में डूबा पीड़ित परिवार

 हाथरस                  
हाथरस केस के पीड़ित परिवार के सामने कई समस्याएं खड़ी हो रही हैं। बेटी के जाने के बाद अब कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने को लेकर अक्सर ही परिवार में विचार विमर्श चलता रहता है। इसके साथ ही रोजगार, कर्ज व पशुओं के चारे की समस्या का भी यह परिवार सामना कर रहा है।

पीड़िता के पिता गांव के पास ही एक निजी संस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का कार्य करते थे। पीड़िता के बड़े भाई की नौकरी लॉकडाउन के चलते चली गई। 14 सितंबर से पीड़िता का छोटा भाई गाजियाबाद से अपनी निजी फर्म में नौकरी को छोड़कर गांव में है। परिवार इस घटना से पहले अपनी भैंस के दूध को बेचकर गुजारा कर लेता था। कुछ बीघा खेत में पशुओं के लिए चारा भी पैदा कर लेते थे। इस बार बाजरा की फसल भी सूख गई। काम धंधा भी नहीं है। पिता ने बताया कि उन पर करीब 35 हजार रुपय का कर्ज भी है। वह कहते हैं कि वह कर्ज चुकता करेंगे। किसी का एक रुपया भी नहीं रखेंगे।

पशुओं को ले गए रिश्तेदार, गांव में उड़ी अफवाह
बूलगढ़ी के पीड़ित परिवार ने गुजारा न होने व परेशानियों के चलते रविवार को अपने दुधारू मवेशियों को रिश्तेदारों को दे दिया। पशुओं के जाते ही गांव में अफवाह उड़ी कि परिवार ने गांव को छोड़ना शुरू कर दिया है। सोमवार को कई जगह गांव में यह चर्चा सुनी गई। गलियों से लेकर खेत में लोग इस बात का जिक्र कर रहे थे। इस अफवाह के बारे में मृतका के पिता व छोटे भाई का कहना है कि यह सब गलत है। यह उनकी जन्मभूमि है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। खेत भी इस बार सूख गया। कोर्ट कचहरी के लिए आए दिन बाहर जाना होगा। ऐसे में पशुओं के दूध को आखिर डेयरी तक कैसे देने जाएंगे, इसलिए रिश्तेदारों को पशु दे दिए। हालांकि एक भैंस अभी भी उनके पास ही है। गांव छोड़ने की तैयारी की बात को पिता पुत्र ने सिरे से खाजिर किया।

हाथरस केस दिल्ली ट्रांसफर होगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट आज लेगी फैसला
हाथरस मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने और मामले को दिल्ली स्थानांतरित कराने का अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगी। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने एक जनहित याचिका और कार्यकर्ताओं तथा वकीलों की ओर से दायर कई अन्य हस्तक्षेप याचिकाओं पर 15 अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

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