उत्तर प्रदेशराज्य

सेना की बढ़ेगी ताकत, कानपुर ने और घातक बनाई पिनाका मिसाइल

 कानपुर 
भारत की प्रसिद्ध पिनाका मिसाइल की ताकत को कानपुर ने और धार दे दी है। उड़ीसा के चांदीपुर रेंज में दो दिन पहले हुए परीक्षण में पिनाका खरी उतरी। स्वदेशी मिसाइल ने 37 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया। पिनाका की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेना में अलग से इस रेजीमेंट का गठन किया जाएगा।  

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने पिनाका रॉकेट प्रणाली के नए संस्करण के लगातार छह रॉकेट छोड़े और लक्ष्य भेदने में सफलता मिली। केवल 44 सेकेंड में 12 पिनाका दागी जा सकती हैं। पिनाका रॉकेट सिस्टम के एडवांस संस्करण मौजूदा पिनाका एमके-आई का स्थान लेंगे। इनका युद्धस्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। यह रॉकेट अत्याधुनिक नेवीगेशन प्रणाली से लैस हैं। इस वजह से यह लक्ष्य की सटीक पहचान कर उस पर निशाना साधने में सक्षम है।

 कानपुर की अहम भूमिका
पिनाका को पहले से ज्यादा मारक बनाने में आर्डिनेंस फैक्टरी कानपुर (ओएफसी) का अहम योगदान है। पिनाका का फिन सिलेंडर और फायर कंट्रोलर स्टेबिलाइजर यहीं तैयार होता है। ये दोनों पुर्जे दुनिया के किसी भी मिसाइल सिस्टम की जान होते हैं। पिनाका में लगने वाला फिन सिलेंडर कानपुर की आर्डिनेंस फैक्टरी में बनता है। फिन सिलेंडर मिसाइल की रफ्तार तय करता है। स्टेबिलाइजर की ताकत से फायरिंग की रेंज और मारक क्षमता तय होती है। इसकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महामारी व लॉकडाउन में भी पिनाका का उत्पादन बंद नहीं हुआ। उसके कलपुर्जों का उत्पादन युद्धस्तर पर जारी रहा।

पिनाका रेजीमेंट बनेगी
अगस्त में रक्षा मंत्रालय पिनाका रॉकेट लांचर खरीदने का समझौता दो घरेलू रक्षा कंपनियों के साथ कर चुका है। इस पर 2580 करोड़ रुपए खर्च होंगे। टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (टीपीसीएल) और लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) के साथ यह अनुबंध किया गया है।

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