राजनीति

साध्वी प्रज्ञा बोलीं – परमबीर सिंह और हेमंत करकरे ने मुझे किया टॉर्चर, वर्दी में गैर कानूनी काम करने वाले नौकरी से हटें

मुंबई
भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ने एक बार फिर दिवंगत आईपीएस ऑफिसर हेमंत करकरे और मुंबई के पुलिस कमिश्नर पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। रिपब्लिक टीवी पर एक बातचीत के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने एक बार फिर अपनी कैद के दिनों को याद करते हुए कहा कि हेमंत करकरे और परमबीर सिंह ने उन्हें हिरासत के वक्त प्रताड़ित किया था। हेमंत करकरे 2006 के मुंबई हमले के बाद आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। पूर्व में भी साध्वी प्रज्ञा ने उनपर कई कटाक्ष किए थे, उनकी टिप्पणी को लेकर काफी विवाद हुआ था। रिपब्लिक टीवी से बातचीत कौ दौरान साध्वी प्रज्ञा ने बीते दिनों कंगना रनौत का ऑफिस तोड़े जाने की कार्रवाई पर कंगना का समर्थन किया। प्रज्ञा ने कहा, 'कंगना रनौत एक महिला है। वो अन्याय के विरुद्ध लड़ती हैं और उसपर भी बहुत जुल्म हुआ है। लेकिन जो लोग असत्य से लड़कर आगे आते हैं वो योद्धा कहलाते हैं। हमारा आंतरिक मन उन घटनाओं को याद करके व्यथित होता है और हर कोई इसे याद करके रोता है। जब मैं अपने टॉर्चर को याद करती हूं तो इस देश को चाहने वाले लोग रोते हैं। हमारा मन पीड़ित होता है कि ऐसे लोग जो कानून की वर्दी में गैर कानूनी काम करते हैं उन्हें सर्विस से मुक्त करना चाहिए।'

कहा- मुझे 24 दिन तक किया था टॉर्चर
साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा कि जब मुझे टॉर्चर किया गया तो मुझे 13 दिन काला चौकी मुंबई में गैर कानूनी तरीके से रखा गया। इसके बाद 11 दिन हम अदालत के आदेश के बाद हिरासत में रहे। इस दौरान 24 दिन में हेमंत करकरे और परमबीर सिंह लोगों के सानिध्य में मुझे तमाम यातनाएं दी गईं। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि जब पहले मैंने हेमंत करकरे का नाम लिया तो लोगों ने मुझपर शहीदों के अपमान का आरोप लगाया। लेकिन सच ये है कि हम शहीदों का अपमान नहीं करते क्योंकि हमारे घर के ही कई लोग सेना की नौकरी करते शहीद हुए हैं।

करकरे पर पहले भी लगाया था आरोप
बता दें कि साध्वी प्रज्ञा ने पूर्व में भी आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे पर कांग्रेस पार्टी की शह पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि हिरासत के दिनों में उनपर काफी जुल्म किया गया। पूर्व में साध्वी प्रज्ञा की टिप्पणी पर कांग्रेस ने काफी विवाद किया था और उन्हें देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए एक अधिकारी का अपमान करने का दोषी कहा था।

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