सबरीमाला मामले में संवैधानिक बेंच 6 फरवरी को करेगी सुनवाई

नई दिल्ली 
सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर रिव्यू पिटिशन पर कोर्ट 6 फरवरी को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच 6 फरवरी को मामले में दाखिल रिव्यू और अन्य अर्जी पर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस ए. एम. खानविलकर, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की संवैधानिक बेंच 6 फरवरी को सुबह साढ़े 10 बजे मामले की सुनवाई करेगी। जस्टिस इंदु मल्होत्रा के मेडिकल लीव पर होने की वजह से 22 जनवरी को इस मामले की सुनवाई नहीं हो पाई थी।  

सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर में तमाम उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने की इजाजत देने वाले फैसले के खिलाफ दाखिल रिव्यू पिटिशन पर ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिए अपने ऐतिहासिक आदेश में तमाम उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में करने का फैसला किया था। 

सुप्रीम कोर्ट में 28 सितंबर के फैसले के खिलाफ 49 याचिकाएं दाखिल की गई थी जिस पर ओपन कोर्ट में संवैधानिक बेंच अब सुनवाई करेगी। वहीं, 3 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर मामले में मंदिर अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की गई अवमानना याचिका पर तुरंत सुनवाई से मना कर दिया था और कहा था कि इस याचिका पर भी रिव्यू पिटिशन के साथ सुनवाई की जाएगी। कोर्ट को बताया गया था कि सबरीमाला मंदिर में 2 महिलाओं के प्रवेश के बाद कथित तौर पर मंदिर अधिकारियों द्वारा शुद्धीकरण और उसके लिए मंदिर को बंद करने का फैसला लिया गया था और यह अदालत के आदेश की अवमानना है। 

अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को कहा था कि केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 बनाम एक से दिए बहुमत के फैसले में कहा था कि 10 साल से लेकर 50 साल की उम्र की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश पर बैन लिंग के आधार पर भेदभाव वाली प्रथा है और ये हिंदू महिलाओं के मौलिक अधिकार का हनन करता है। 

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