उत्तर प्रदेशराज्य

 सफाई कर्मचारियों के वेतन में 32 लाख का गबन 

 मैनपुरी 
डीपीआरओ दफ्तर में कार्यरत एक सफाई कर्मचारी साथी सफाई कर्मचारियों के वेतन में गड़बड़ी करता रहा और अधिकारियों की नजर नहीं पड़ी। भाजपा नेता की शिकायत पर जांच कराई गई तो सफाई कर्मचारियों के वेतन से लाखों रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हो गया। दोषी कर्मचारी ने पिछले 3 सालों में 32 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। डीपीआरओ की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

शनिवार को डीपीआरओ स्वामीदीन ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर जानकारी दी कि वर्ष 2017 में सफाई कर्मचारी कुलभूषण सिंह पुत्र रमेश सिंह निवासी हरिहरपुर को तत्कालीन डीपीआरओ ने दफ्तर के अकाउंट विभाग में कंप्यूटर के कार्य के लिए अटैच कर लिया था। तत्कालीन बिल लिपिक के साथ कुलभूषण को सफाई कर्मचारियों के वेतन, एरियर आदि की फीडिंग करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

आरोप है कि कुलभूषण ने 2017 से लेकर 2020 तक आधा दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारियों के वेतन से जुड़े 32 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। सफाई कर्मचारियों के बैंक खातों में रुपए डालने के बजाय कुलभूषण ने यह रुपए अपने बैंक खाते पत्नी सुधा के बैंक खाते तथा मिथिलेश नाम की एक महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर किए। हर महीने यह रकम इन तीन खातों में ट्रांसफर हो रही थी लेकिन न तो इसकी जानकारी बिल लिपिक और न ही एकाउंटेंट और डीपीआरओ को हुई। भाजपा नेता राहुल चतुर्वेदी की शिकायत पर इस मामले की जांच शुरू कराई गई थी।

घोटालेबाज कुलभूषण या और भी हैं शामिल
कुलभूषण ने उन सफाई कर्मचारियों के वेतन को अपने अपनी पत्नी और महिला के खाते में ट्रांसफर किया जो सफाई कर्मचारी सस्पेंड हो चुके थे या फिर संबंधित ब्लॉक से उनके वेतन रिलीज करने के प्रमाण पत्र नहीं आ रहे थे। इसका फायदा उठाया गया और खाते बदल कर महीने का वेतन ट्रांसफर करने का खेल चलता रहा। लाख टके का सवाल यह है कि अकेले कुलभूषण ने ही यह धोखाधड़ी की। ऐसा संभव नहीं लगता क्योंकि हर महीने वेतन ट्रांसफर होता था। बिल लिपिक एकाउंटेंट और डीपीआरओ इतने नासमझ थे कैसे बने रहे कि तीन वर्षों में किसी को भी हर महीने में हो रही इस धोखाधड़ी को जानने की कोशिश नहीं की। वेतन भेजने का गोपनीय पासवर्ड भी आरोपी के पास था। खास बात यह है सफाई कर्मचारियों के खातों में वेतन भेजा जाता है।

ऑनलाइन वेतन भेजने के लिए जो पासवर्ड होता है वह पासवर्ड भी आरोपी के पास था और वही पासवर्ड के सहारे खातों में धनराशि भेज रहा था। जबकि पासवर्ड की जिम्मेदारी डीपीआरओ की रहती है। 3 सालों से इस बात पर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया और इतना बड़ा घपला हो गया। कोतवाली प्रभारी भानु प्रताप सिंह ने बताया डीपीआरओ की तहरीर पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच शुरू कराई गई है।

मामला उनके संज्ञान में है। जांच में संबंद्ध सफाई कर्मी वेतन के 32 लाख की धोखाधड़ी करने का दोषी पाया। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोपी को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया है। – स्वामीदीन, डीपीआरओ, मैनपुरी

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