राष्ट्रीय

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी की टेंशन बरकरार

मुंबई
रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी से सीधे तौर पर जुड़ी करीब एक हजार पेज की व्हाट्सऐप चैट्स पिछले दो दिनों में सोशल मीडिया में वायरल हुई हैं। पर यदि मुंबई क्राइम ब्रांच से जुड़े सूत्रों पर भरोसा करें, तो आने वाने महीनों में ऐसी हजारों और चैट्स कोर्ट में बतौर एविडेंस सौंपी जाएंगी। एक अधिकारी के अनुसार, हमने इस केस में अभी तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और दो किस्तों में उन पर गत नवंबर और अब जनवरी में चार्जशीट दायर की है। लीक हुई वॉट्सऐप चैट्स उन्हीं चार्जशीट का हिस्सा हैं। लेकिन हमारे केस में अभी भी रिपब्लिक टीवी से ही जुड़े करीब आधा दर्जन लोग वॉन्टेड हैं। जब हम इन सबको गिरफ्तार करेंगे और उनके खिलाफ कोर्ट में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेंगे, तो बतौर सबूत बहुत से डिजिटल कागजात कोर्ट में जमा करेंगे। उनमें इन वॉन्टेड आरोपियों की वॉट्सऐप चैट्स भी होंगी। अरनब को बॉम्बे हाई कोर्ट से 29 जनवरी तक प्रोटेक्शन मिला हुआ है। यदि वह भी इस केस में गिरफ्तार हुए, तो उनके खिलाफ दायर होने वाले पूरक आरोपपत्र में उनसे जुड़ी कई और वॉट्सऐप चैट्स शामिल की जाएंगी। अभी जो व्हाट्सऐप चैट्स सार्वजनिक हुई हैं, वह ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व CEO पार्थदास गुप्ता और CFO रोमिल रामगढ़िया के मोबाइल डेटा से निकाली गई चैट्स हैं, जिन्हें मुंबई क्राइम ब्रांच इस केस में पिछले महीने गिरफ्तार कर चुकी है। पार्थदास गुप्ता की अरनब गोस्वामी के साथ 7 जनवरी, 2017 को रात 9 बजकर 44 मिनट की एक बड़ी दिलचस्प चैट है। इसमें अरनब कहते हैं कि हम दोनों की व्हाट्सऐप पर चैट्स और कॉल्स कोई पढ़ और सुन नहीं सकता। यहां तक की व्हाट्सऐप कंपनी से जुड़े लोग भी। शायद यह अति आत्मविश्वास ही उनके खिलाफ सबूत बन गया।

एक चैट में पार्थ दासगुप्ता अरनब को रिपब्लिक टीवी के डिस्ट्रीब्यूशन और प्रोग्रामिंग के बारे में गाइड करते हैं, जबकि एक दूसरे चैट में दासगुप्ता BARC के CFO रोमिल रामगढ़िया से कहते हैं कि आप रिपब्लिक टीवी के CEO विकास खानचंदानी से कहो कि चैनल के डिस्ट्रीब्यूशन को कहां पर बढ़ाना है। विकास खानचंदानी भी इस केस में अरेस्ट हो चुके हैं। कुछ महीने पहले जब नेशनल ब्रॉडकास्ट असोसिएशन (NBA) द्वारा रिपब्लिक टीवी को हड़काया जा रहा था, तो एक चैट से पता चलता है कि पार्थ दासगुप्ता अरनब को कानूनी दावंपेच और मीडिया मैनेजमेंट के बारे में समझा रहे थे। एक अन्य चैट में पार्थ दासगुप्ता और अरनब गोस्वामी की साजिश का बहुत बड़ा सबूत सामने आया है। रिपब्लिक टीवी के लॉन्च होने से पहले तक BARC की यह पॉलिसी थी कि किसी भी नए टीवी की टीआरपी उसके लॉन्च होने के चार सप्ताह बाद ही जारी की जाएगी। लेकिन रिपब्लिक के मामले में पार्थ दासगुप्ता ने बतौर BARC चीफ इस पॉलिसी को तोड़ा। मुंबई क्राइम ब्रांच का दावा है कि टाइम्स नाऊ को नंबर वन से नंबर दो करने और रिपब्लिक टीवी को नंबर एक करने के लिए पार्थ दासगुप्ता ने हर हथकं अपनाया।

फर्जी टीआरपी केस की जांच से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में हुआ, जब मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस केस में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के ज्यूरिडिक्शन को लेकर सवाल उठाए। खास बात यह है कि ED इस टीआरपी केस का इनवेस्टिगेशन मुंबई में दर्ज एफआईआर पर नहीं कर रही है, बल्कि उस एफआईआर पर कर रही है, जो बहुत गुपचप तरीके से लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में 17 अक्टूबर, 2020 को दर्ज हुई थी और जिस FIR पर केस अगले ही दिन सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। सुशांत सिंह केस की तर्ज पर कहीं लखनऊ की एफआईआर पर सीबीआई मुंबई क्राइम ब्रांच का टीआरपी वाला केस अपने पास न ले ले, महाराष्ट्र सरकार ने इस आशंका में गत अक्टूबर में ही एक आदेश निकाला कि सीबीआई अब से महाराष्ट्र सरकार की अनुमति के बिना किसी भी केस को सीधे अपने हाथ में नहीं ले सकती। खास बात यह है कि टीआरपी केस में सीबीआई के इनवेस्टिगेशन का क्या स्टेटस है, किसी को पता नहीं। लेकिन ED ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि उसके अब तक के इनवेस्टिगेशन की स्टेटस रिपोर्ट तैयार है। यहां अहम यह है कि ED को मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से किसी केस के इनवेस्टिगेशन के लिए किसी की इजाजत नही लेनी पड़ती है। उसके लिए किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज सिर्फ एफआईआर ही मायने रखती है। सुशांत सिंह केस की भी ED ने इसी आधार पर जांच की और अब उस पीएमसी घोटाले की भी कर रही है, जिसमें संजय राउत की पत्नी को एक पखवाड़े पहले पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

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