अंतरराष्ट्रीय

राष्ट्रपति बनते ही बाइडेन ले सकते हैं बड़ा फैसला, 5 लाख भारतीयों को नागरिकता मिलने का रास्‍ता होगा साफ

वाशिंगटन
अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन देश में रहने वाले करीब 5 लाख भारतीयों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। जी हां, बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जो बाइडेन 5 लाख भारतीयों समेत लगभग 1 करोड़ 10 लाख ऐसे प्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान करने का रोडमैप तैयार करेंगे, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं। इसके अलावा वह सालाना न्यूनतम 95,000 शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश दिलाने की प्रणाली भी बनाएंगे। बाइडेन के अभियान द्वारा जारी एक नीतिगत दस्तावेज में यह जानकारी दी गई है। दस्तावेज में कहा गया है, 'वह (बाइडेन) जल्द ही कांग्रेस में एक आव्रजन सुधार कानून पारित कराने पर काम शुरू करेंगे, जिसके जरिए हमारी प्रणाली को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके तहत 5 लाख से अधिक भारतीयों समेत लगभग एक करोड़ 10 लाख ऐसे आप्रवासियों को अमेरिका की नागरिकता प्रदान करने का रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं।' दस्तावेज के अनुसार, 'वह अमेरिका में सालाना 1,25,000 शरणार्थियों को प्रवेश देने का लक्ष्य निर्धारित करेंगे। इसके अलावा वह सालाना न्यूनतम 95,000 शरणार्थियों को देश में प्रवेश दिलाने के लिए कांग्रेस के साथ काम करेंगे।'

मुबई में रहते हैं बाइडेन के रिश्तेदार
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन 2013 में देश की आर्थिक राजधानी आए थे और तब उन्होंने कहा था कि उनके दूर के रिश्तेदार मुंबई में रहते हैं। दो साल बाद वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में बाइडेन ने अपना दावा दोहराते हुए कहा था कि मुंबई में पांच बाइडेन रहते हैं। बाइडेन, अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में दो महीने में शपथ लेने वाले हैं और अभी तक मुंबई के किसी व्यक्ति ने उनका रिश्तेदार होने का दावा नहीं किया है। सीनेट सदस्य बनने के बाद ‘बाइडेन’ उपनाम वाले किसी व्यक्ति ने उन्हें मुंबई से चिट्ठी लिखी थी। इस घटना के दशकों बाद बाइडेन को पता चला था कि उनके पिता के वंश में कई पीढ़ी पहले कोई पूर्वज ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करते थे। तत्कालीन उपराष्ट्रपति बाइडेन ने 2015 में वाशिंगटन में एक सभा में कहा था, 'भारत के मुंबई में पांच बाइडेन हैं।'

भारत यात्रा के दौरान बाइडेन ने किया था पत्र का जिक्र
उपराष्ट्रपति के रूप में भारत की अपनी पहली यात्रा पर 2013 में जब बाइडेन मुंबई आए थे तब उन्होंने उस पत्र के बारे में जिक्र किया था जो उन्हें तब मिला था जब दशकों पहले वह पहली बार सीनेट के सदस्य बने थे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 24 जुलाई 2013 को दिए अपने भाषण में बाइडेन ने ‘मुंबई के बाइडेन’ की कहानी सुनाई थी। सात साल पहले उन्होंने कहा था, “भारत और मुंबई में आना गर्व का विषय है। जब 1972 में 29 वर्ष की आयु में मुझे अमेरिका की सीनेट का सदस्य चुना गया तब मुझे एक पत्र प्राप्त हुआ था और मुझे दुख है कि मैंने कभी उसकी पड़ताल नहीं की।” उन्होंने कहा था, 'संभव है कि श्रोताओं में से कोई मुझे बता सके, मुझे मुंबई के बाइडेन नामक एक व्यक्ति का पत्र मिला था जो कि मेरा नाम है, उसमें लिखा था कि वह मेरा रिश्तेदार है।'

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