मध्य प्रदेशराज्य

योजनाओं का लाभ दिलाने दिव्यांगजनों को यूनिक डिसएबिलिटी कार्ड अब तक नहीं बने, कैसे लेंगे योजना का लाभ

भोपाल
प्रदेश के सभी दिव्यांगजनों को अब शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनके यूनिक डिसएबिलिटी कार्ड (यूडीआईडी) बनाए जाने है। लेकिन प्रदेश के एक लाख 36 हजार दिव्यांगों के यूडीआईडी कार्ड अब तक नहीं बन पाए है। इसको लेकर सामाजिक न्याय आयुक्त रेणू तिवारी ने कलेक्टरों और मैदानी अफसरों पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभी दिव्यांगों के यूडीआईडी कार्ड बनाए जाने के निर्देश दिए है।

सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सिविल सर्जनों को दिव्यांगों को यूडीआईडी कार्ड जनरेट करने और नवीन दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने को कहा गया है। प्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक 15 लाख 51 हजार दिव्यांग है। इनमें से सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग ने स्पर्श पोर्टल पर 6 लाख 47 हजार से अधिक दिव्यांगजनों का चिन्हांकन किया है। यूडीआईडी पोर्टल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अभी 5 लाख 10 हजार दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड जनरेट किए गए है। लेकिन अभी भी एक लाख 36 हजार से अधिक ऐसे दिव्यांगजन है जो स्पर्श पोर्टल पर चिन्हित है लेकिन उनका यूडीआईडी कार्ड जनरेट नहीं हुआ है।

सामाजिक न्याय आयुक्त रेणु तिवारी ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन उनके जिले के मेडिकल बोर्ड द्वारा पिछले दस वर्षो में जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जानकारी संकलित करे और इस डेटा का उपयोग स्पर्श पोर्टल पर चिन्हित दिव्यांगजनों के डेटा के रूप में किया जा सकता है।  लक्षित डेटा के आधार पर पूर्व में जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदनों को यूडीआईडी पोर्टल पर आॅनलाइन दर्ज कर प्रमाणिक दस्तावेज के आधार पर सत्यापन की कार्यवाही सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के अधिकारियों से कराई जाए। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी डेटा को सत्यापित करने से पूर्व यह सुनिश्चित करे कि आवेदन में संबंधित दिव्यांगजन का नौ अंकों का समग्र आईडी कार्ड भी दर्ज हो। समग्र आईडी दर्ज होेने से उसे स्पर्श पोर्टल से लिंक किया जा सकेगा। सत्यापन के बाद जानकारी में संशोधन नहीं होगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन मेडिकल बोर्ड की रिकमंडेशन को दर्ज कर दिव्यांगता प्रमाणपत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करे।

सामाजिक न्याय आयुक्त रेणु तिवारी ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन उनके जिले के मेडिकल बोर्ड द्वारा पिछले दस वर्षो में जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जानकारी संकलित करे और इस डेटा का उपयोग स्पर्श पोर्टल पर चिन्हित दिव्यांगजनों के डेटा के रूप में किया जा सकता है।  लक्षित डेटा के आधार पर पूर्व में जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदनों को यूडीआईडी पोर्टल पर आॅनलाइन दर्ज कर प्रमाणिक दस्तावेज के आधार पर सत्यापन की कार्यवाही सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के अधिकारियों से कराई जाए। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी डेटा को सत्यापित करने से पूर्व यह सुनिश्चित करे कि आवेदन में संबंधित दिव्यांगजन का नौ अंकों का समग्र आईडी कार्ड भी दर्ज हो। समग्र आईडी दर्ज होेने से उसे स्पर्श पोर्टल से लिंक किया जा सकेगा। सत्यापन के बाद जानकारी में संशोधन नहीं होगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन मेडिकल बोर्ड की रिकमंडेशन को दर्ज कर दिव्यांगता प्रमाणपत्र एवं यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करे।

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