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मुक्तिजोधा मोर्चा ने बंगबंधु की हत्या को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन, कहा- माफी मांगें पाक पीएम

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ढाका (बांग्लादेश)
बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान (Bangabandhu Sheikh Mujibur Rehman) की पुण्यतिथि मनाने के लिए बांग्लादेश की राजधानी ढाका में उनकी 47वीं पुण्यतिथि और राष्ट्रीय शोक दिवस पर 15 अगस्त को पाकिस्तान विरोधी विरोध प्रदर्शन हुए। मुक्तिजोधा मोर्चा द्वारा धनमंडी में एक दिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहीं पर 1975 में बंगबंधु की हत्या कर दी गई थी। मोर्चा ने बंगबंधु की हत्या में शामिल होने के लिए बांग्लादेश के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के नाम पर राजनयिक पुलिस को एक याचिका सौंपी।

पाकिस्तान बंगबंधु की हत्या में शामिल होने से कर रहा इनकार
एक ज्ञापन में, मुक्तिजोधा मोर्चा ने कहा, हालांकि बांग्लादेश की मुक्ति के पांच वर्ष बीत चुके हैं। फिर भी इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान बंगबंधु की हत्या में शामिल होने से इनकार कर रहा है। उसने अभी तक बांग्लादेश के लोगों पर किए गए अत्याचारों और असंख्य कष्टों के लिए औपचारिक माफी की पेशकश नहीं की है। मोर्चा ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा मुद्दों को टाला है, हालांकि यह घोषणा करता है कि वह बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को सुधारना चाहता है, जो वास्तविकता के विपरीत है।

मुंक्तिजोधा मोर्चा ने निकाला कैंडल मार्च
मुक्तिजोधा मोर्चा ने बंगबंधु को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कैंडल मार्च भी निकाला। 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराया गया था। बांग्लादेश के लोगों का मानना ​​है कि बंगबंधु की हत्या पाकिस्तानी एजेंटों ने की थी। एक और बयान में, मुक्तिजोधा मोर्चा ने कहा, 'पाकिस्तान बंगबंधु हत्या, ग्रेनेड हमलों और मुक्ति युद्ध के नरसंहार की क्रूरता के लिए बांग्लादेश के लोगों से बिना शर्त माफी मांगे।'  मंच ने यह भी आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान में कुछ ताकतें अभी भी प्रधानमंत्री शेख हसीना के सफल नेतृत्व में बांग्लादेश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं।

बंगबंधु की हत्या में शामिल था आईएसआई
मुक्तिजोधा मंच ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को पाकिस्तान का आईएसआई सीधे बंगबंधु हत्या में शामिल था। मुक्ति युद्ध में आत्मसमर्पण का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने बंगबंधु की सरकार के खिलाफ साजिश करना शुरू कर दिया। जिया-मोस्तक ने पाकिस्तान की मदद से बंगबंधु और उनके परिवार के सदस्यों को मार डाला जो दुनिया के इतिहास में सबसे क्रूर राजनीतिक हत्या थी।

बंगबंधु की दोनों बेटियों की बची जान
शेख मुजीबुर के अलावा, उनकी पत्नी बंगमाता बेगम फिजिलातुन नेसा मुजीब और उनके तीन बेटे, शेख कमाल, शेख जमाल और शेख रसेल के साथ ही तीन करीबी रिश्तेदार भी हमले में मारे गए। हालांकि बंगबंधु की दो बेटियां शेख हसीना और शेख रेहाना नरसंहार से बच गईं क्योंकि वे घटना के समय विदेश में थीं।

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