छत्तीसगढ़राज्य

महिला स्व-सहायता समूहों को दिया जा रहा मल्टीगे्रन आटा बनाने का प्रशिक्षण

रायपुर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर द्वारा धरसींवा विधानसभा के ग्राम मांढ? (टेकारी) के  ओम साई राम बिहान महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों को मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट को सोयाबीन, चना, मक्का, रागी, ज्वार एवं बाजरा को निश्चित अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है। इस मल्टीग्रेन आटा में प्रति 100 ग्राम 25.23 प्रतिशत प्रोटीन, 17.31 प्रतिशत फाईबर एवं 354.55 किलो कैलोरी पाई जाती है।

महिला स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार किया गया मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट 150 रुपए प्रति 750 ग्राम की दर पर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित उत्पाद विक्रय केन्द्र के माध्यम से विक्रय किया जाता है। 750 ग्राम मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट में उपभोगता 7.5 किलोग्राम गेहूं का आटा मिलाकर बाजार के समतुल्य मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को स्वरोजगार का एक नया अवसर प्रदान करेगा एवं यह प्रयास कुपोषण दूर करने में भी सहायक होगा।

उल्लेखनीय है कि कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर द्वारा सोयाबीन, मक्का, चना, रागी एवं बाजार से ज्वार एवं बाजरा के आटे को निश्चित अनुपात में मिलाकर मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट बनाने का कार्य विगत वर्ष प्रारंभ किया था। गेहूं आटे को अधिक पौष्टिक बनाने हेतु इसमें मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट को मिलाकर आटा तैयार किया जाता है जिसे मल्टीग्रेन आटा कहते हैं। बाजार में उपलब्ध मल्टीग्रेन आटे में केवल 9 प्रतिशत मल्टीग्रेन व 91 प्रतिशत गेहूँ का आटा होता है। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के मार्गदर्शन में तैयार इस मल्टीगे्रन आटा कॉनसेन्ट्रेट में सोयाबीन, मक्का, चना, रागी, बाजरा व ज्वार के आटों को निश्चित मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है। इसमें गेहूँ का आटा नहीं मिलाया जाता। इस मल्टीग्रेन आटा कॉनसेन्ट्रेट की गुणवता, सेल्फ लाइफ, आगेर्नोलेप्टिक का टेस्ट कराने के उपरान्त इस वर्ष ओम साई राम बिहान स्व सहायता समूह को इसे बनाने का प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा दिया गया है। वर्तमान में इसकी पैकिंग 750 ग्राम के एयर टाइट डब्बे में की जा रही है, जिसकी कीमत 150 रू. है। महिला समूह को आटे की पैकिजिंग व लेबलिंग का प्रशिक्षण भी कृषि विज्ञान केन्द्र, द्वारा दिया गया है। इसे मुख्यमंत्री सुपोषण योजना अंतर्गत विभिन्न ग्रामों, ब्लाक व जिले स्तर पर समाहित किये जाने की अपार संभावना है।

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