छत्तीसगढ़राज्य

मरवाही नकली आदिवासी के चंगुल से हुआ मुक्त, नामांकन रद्द होने का आदिवासी नेताओं ने किया स्वागत

रायपुर
मरवाही विधानसभा उपचुनाव में नकली प्रमाण पत्र वालों के नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुये छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, उद्योग मंत्री कवासी लखमा और कांकेर विधायक शिशुपाल शोरी, सांसद एवं महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम, सांसद दीपक बैज, विधायक लखेश्वर बघेल, विधायक चंदन कश्यप ने कहा है कि स्पष्ट हो गया कि 15 साल तक रमन भाजपा की  सरकार में आदिवासी के हक को मारने वाले को ही संरक्षण दिया गया । छानबीन समिति ने जांच कर अमित जोगी और ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया और निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्र रद्द किया।

आदिवासी नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा है कि आदिवासी समाज लगातार इस बात के लिए मांग करता रहा कि असली आदिवासियों को ही आदिवासियों के हितों का लाभ मिले। विश्व आदिवासी दिवस तथा आदिवासी समाज के अनेक सम्मेलनों और कार्यक्रमों में आदिवासी समाज लगातार मांग करता रहा है कि वास्तविक आदिवासियों को ही आदिवासियों के लिए हितों का लाभ मिलना चाहिए और जो नकली आदिवासी आदिवासियों के हितों पर नौकरी से लेकर राजनीति तक नाजायज रूप से लाभ लेते  रहे हैं उस पर रोक लगनी चाहिए। आज मरवाही उपचुनाव में नकली जाति प्रमाण पत्र वालों के नामांकन रद्द किए जाने की घटना इस दिशा में एक बड़ा फैसला है जिसका आदिवासी समाज स्वागत करता है।

आदिवासी नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा है कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ के आदिवासी वर्ग और मरवाही के जनता को न्याय मिला है । मरवाही विधानसभा क्षेत्र आदिवासियों के लिए आरक्षित है। आदिवासी वर्ग के अधिकारों को 15 साल तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छीना जाता रहा। मरवाही के जनता एवं छत्तीसगढ़ को धोखे मे रखा गया।15 साल से रमन भाजपा सरकार का जो षड्यंत्र आदिवासी वर्ग के अधिकार को हनन करने का चल रहा था, उसका अब फदार्फाश हो गया है। 15 साल तक मरवाही सीट नकली आदिवासी के चंगुल में फंसी थी जिससे मरवाही को मुक्ति मिला है । मरवाही समेत पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज इस निर्णय  का स्वागत कर रहे है खुश है । भाजपा और भाजपा के बी टीम के सांठगांठ का अब जाकर फदार्फाश हुआ है।

आदिवासी नेताओं संयुक्त बयान में कहा है कि लोकतंत्र से जुड़ी एक मजबूत प्रक्रिया का आदिवासी समाज हमेशा से सम्मान करता रहा है और जब कभी भारतीय गणतंत्र के अनुरूप निर्वाचन संपन्न कराए जाने की प्रक्रिया आरंभ होती है तो बहुत जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ इसकी प्रारंभिक प्रक्रिया में भाग लिया जाता है मतदान की प्रक्रिया से इनको अलग करने का आदिवासी समाज स्वागत करता है। यह साबित करता है कि बहुत गंभीरता और संजीदगी के साथ निर्वाचन प्रक्रिया की कार्यवाही संपादित की जा रही है। आदिवासी नेताओं संयुक्त बयान में कहा है कि ने कहा है कि मरवाही उपचुनाव में अमित जोगी और रिचा जोगी के निर्वाचन फॉर्म का निरस्त होना अपने आप में यह सिद्ध करता है कि लंबे समय से इनके परिवार के प्रति आदिवासी समाज, सामाजिक स्तर से लेकर न्यायालय तक संघर्षरत रहा है और अब ऐसा महसूस होता है कि शायद वास्तविकता सामने आ चुकी है और दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है।

आदिवासी नेताओं संयुक्त बयान में कहा है कि जोगी परिवार को लेकर आदिवासी होने को लेकर कई अटकलें लगातार चलती रही जिसको लेकर आदिवासी समाज में गहरी नाराजगी भी रही। भारतीय लोकतंत्र के निर्वाचन का यह महत्वपूर्ण आदेश अपने आप में यह सिद्ध करता है कि कौन अपने स्वार्थ के नाम पर जाति या धर्म करता है।

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