बिज़नेस

मध्य प्रदेश के सराफा बाजार को 500 करोड़ रुपये का नुकसान

इंदौर। अबूझ मुहूर्त कहे जाने वाले अक्षय तृतीय में कोरोना महामारी का विघ्न सराफा कारोबार पर भारी पड़ रहा है। मध्य प्रदेश के सराफा कारोबार को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। शहरों से लेकर गांव तक फैले कोरोना संक्रमण के कारण शादी-ब्याह के आयोजन रुकने से सराफा का कारोबार भी रुक गया। सोने-चांदी के गहनों की बिक्री के लिहाज से अक्षय तृतीया और आसपास के दिन साल का सबसे बड़ा कारोबारी सीजन माना जाता है। मध्य प्रदेश के कुल सराफा कारोबार और छोटे-मध्यम ज्वेलर्स के लिए आखातीज दीवाली से भी बड़ा व्यापारिक मौका होता है। मध्य प्रदेश सोना-चांदी व जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने आंकड़ा जारी करते हुए कहा है कि सिर्फ प्रदेश के ग्रामीण और छोटे शहरों के कारोबार को ही कम से कम 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बड़े शहरों के व्यापार को जोड़ने पर आंकड़ा करीब 500 करोड़ तक पहुंच रहा है। एसोसिएशन के सचिव संतोष सर्राफ के अनुसार अक्षय तृतीया असगंठित ज्वेलर्स यानी परंपरागत बाजारों और सराफा कारोबारियों के लिए बिक्री का सबसे बड़ा मौका है। गांव से लेकर शहरों तक इस मुहूर्त में सबसे ज्यादा शादियां होती है। किसानों के पास भी गेहूं की फसल का पैसा रहता है। ऐसे में गहनों की खरीदी भी जमकर की जाती है। दीवाली पर भी गहनों की बिक्री होती है लेकिन फिर भी बिक्री के लिहाज से दीवाली का सीजन दीवाली के बाद ही माना जाता है। दीवाली पर मुहूर्त में छोटे गहने-सिक्के खरीदे जाते हैं। उस समय कापोर्रेट ज्वेलर्स का कारोबार ज्यादा होता है। इंदौर सोना-चांदी व्यापारी एसोसिएशन के मंत्री अविनाश शास्त्री के अनुसार पूरे वर्ष में गहनों की बिक्री के लिहाज से अप्रैल और मई के महीने में लगातार व्यापार चलता है और सबसे ज्यादा बिक्री होती है। हर ज्वेलर्स के लिए ये दोनों माह सबसे अहम होते हैं। कोरोना के चलते दोनों ही महीनों की बिक्री खत्म हो गई। आयोजन टलने से लोगों ने पहले से दिए आर्डर भी कैंसिल कर दिए।

पुराने गहने गलाने की नौबत
1 जून से सरकार देश में हॉलमार्किंग अनिवार्य कर रही है। मध्य प्रदेश सराफा एसोसिएशन के सचिव संतोष सर्राफ के मुताबिक 1 जून से 14,18 और 22 कैरेट के गहने ही बिकेंगे। लाकडाउन लगने और शादियां टलने से 20 कैरेट और 23 कैरेट के साथ ही अन्य कैरेट में बने विविध प्रकार के गहनों का तैयार स्टाक बिकने से रह गया है। कानून के पेंच में फंसने से बचने के लिए मजबूरी में अब ज्वेलर्स को ऐसे सभी गहनों को गलाना पड़ेगा।

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