उत्तर प्रदेशराज्य

ब्राजील मॉडल से रोका जाएगा  यूपी में बालश्रम, पढ़ाई की भी व्यवस्था

 लखनऊ  
सूबे में बालश्रम पर अंकुश लगाने के लिए अब ब्राजील मॉडल को अपनाया जाएगा। ब्राजील मॉडल के तहत ऐसे बाल श्रमिकों को चिह्नित किया जाएगा,जिनके ऊपर बाल मजदूरी कर परिवार चलाने की जिम्मेदारी है और इन बाल श्रमिकों के माता-पिता कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। इन बाल श्रमिकों को विद्या योजना से जोड़कर आर्थिक सहायता के साथ ही उनकी पढ़ाई की भी व्यवस्था की जाएगी। श्रम विभाग ने पहले चरण में 20 जिलों में इस कार्ययोजना को लागू कर दिया है। 

राज्य में श्रम विभाग के सर्वे में 19.27 लाख बाल श्रमिकों की पहचान हुई है। तमाम योजनाओं के बाद भी बालश्रम पर लगाम नहीं लग रही। इसलिए श्रम विभाग ने ब्राजील मॉडल में पहले ऐसे बाल श्रमिकों को सुधारने का फैसला किया है,जो बाल मजदूरी नहीं करेंगे तो उनके परिवार के सदस्य भूखे रहेंगे।

ब्राजील की तर्ज पर असहाय माता-पिता, विकलांग माता-पिता,बीमार माता-पिता,दोनों या एक की मौत पर उनके बच्चे बाल मजदूरी ही करते हैं,उनकी पहचान कर सूचीबद्ध किया जाएगा। फिर उनकी बाल मजदूरी छुड़वा कर उन्हें यानी लड़के को 1 हजार और लड़की को 12 सौ रुपए की आर्थिक सहायता हर महीने दी जाएगी।

साथ ही विद्या योजना से जोड़कर उनका स्कूलों में प्रवेश कराकर पढ़ाया जाएगा। होनहार बच्चे की पहचान के लिए मानीटरिंग कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी ऐसे बच्चों पर विशेष नजर रख कर उन्हें आगे पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ शिक्षण संस्थाओं में एडमिशन कराएगी। 

श्रम विभाग के राज्य समन्वयक (बाल श्रम) रिजवान अली ने बताया कि ब्राजील मॉडल को पहले बीस जिलों में किया जा रहा है। कुछ जिलों में अभियान शुरू हो गया है। ब्राजील में ऐसे बच्चों के पुनर्वास और शिक्षित करने के साथ बाल श्रम पर काफी हद तक अंकुश लगाने में सफलता मिली है। इसमें यूनीसेफ के भी सुझावों को भी अमल में लाया जा रहा है। 

इन जिलों में लागू होगा मॉडल 

पहले चरण में कानपुर, लखनऊ, आगरा, बरेली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बदायूं, बाराबंकी, बलिया, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, गोरखपुर, इलाहाबाद में ब्राजील मॉडल को लागू किया जाएगा।

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