उत्तर प्रदेशराज्य

बिकरू कांड में 80 अधिकारी व कर्मचारी दोषी पाए

लखनऊ
बिकरू कांड के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट सौंप दी है। एसआईटी की जांच में कानपुर व कानपुर देहात में तैनात रहे 80 अधिकारी व कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। इनमें से करीब 50 पुलिस वाले हैं। एसआईटी ने सभी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

एसआईटी की जांच रिपोर्ट 3,200 पेज की है। इनमें सबसे अहम 700 पेज हैं, जिनमें दोषियों की विकास दुबे और उसके गैंग से मिलीभगत से जुड़ी जानकारियां हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे पुलिसवाले विकास दुबे और उसके गैंग को कार्रवाई से जुड़ी जानकारियां लीक करते थे। दो-तीन जुलाई की रात भी पुलिस दबिश की सूचना विकास दुबे के पास पहले ही पहुंच गई थी। इसके बाद उसने बाकायदा असलहे और गैंग के लोगों को जमा किया फिर दबिश देने पहुंचे पुलिस वालों में से आठ को घेरकर मार डाला।

नौ बिंदुओं पर जांच
10 जुलाई 2020 को पुलिस मुठभेड़ में विकास दुबे के मारे जाने के बाद 11 जुलाई को आईएएस संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन हुआ था। एसआइटी को पुलिसवालों की भूमिका, विकास दुबे के आर्थिक रैकेट समेत कुल नौ बिंदुओं पर जांच करने के निर्देश दिए गए थे। जांच पूरी करने के लिए एसआईटी को पहले 31 जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया था।

100 से ज्यादा अफसर-कर्मचारी थे रेडार पर
पुलिस, राजस्व, आपूर्ति, आबकारी व अन्य विभागों के 100 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी एसआईटी जांच के दायरे में थे। इनमें से करीब 80 दोषी पाए गए हैं। खासतौर से असलहों के लाइसेंस जारी करने और राशन की दुकानों के आवंटन से जुड़े अधिकारी एसआईटी द्वारा की गई कार्रवाई की सिफारिश की जद में आए हैं।

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