उत्तर प्रदेशराज्य

बनारस में दिन से ज्यादा रात की हवा हुई जहरीली

 वाराणसी 
दिन हो या रात, शहर में प्रदूषण की स्थिति हर वक्त गंभीर बनी हुई है। बल्कि दिन से ज्यादा अब रात की हवा जहरीली हो गई है। यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट से जारी की गई है। हवा में मौजूद पीएम-10 का इंडेक्स दिन में जहां 300 और उसके पास रहता है, वहीं रात में यह बढ़कर 400 तक पहुंच जाता है। विभाग इसके लिए दिन-रात चल रहे निर्माण कार्यों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं रह गई है। 

प्रदूषण के मामले में बनारस भी महानगरों की भांति खराब और खतरनाक स्थिति में पहुंच जा रहा है। बुधवार का दिन छोड़ दिया जाए तो पिछले चार दिनों की यह स्थिति है कि रात की हवा ज्यादा प्रदूषित है। इसमें भी रात 10 बजे से सुबह आठ बजे तक की स्थिति और गंभीर है। यानी यहां पीएम-10 (प्रदूषक) की मात्रा 320 या उससे ऊपर तक पहुंच जा रहा है। 9 नवंबर की रात में अधिकतम मात्रा 420 तक पहुंच गई थी, जो शहरवासियों के लिए चिंता की विषय है। 

डॉक्टरों की मानें तो रात की हवा का ज्यादा प्रदूषित होना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। क्योंकि सोते समय दूषित हवा शरीर में ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। पर्यावरणविदों का मानना है कि लगातार निर्माण से पेड़-पौधे कट रहे हैं। इससे प्रदूषक हवा में ज्यादा समय तक रह रहा है, जो रात-दिन दोनों समय खतरनाक साबित होगा।मिट्टी ढुलाई से धूल से पट रहीं सड़केंरात में सड़क किनारे सड़कों की खुदाई और ढुलाई से पूरी सड़कें मिट्टी से पट जाती है। रात में बड़े वाहनों का आवागमन ज्यादा होने से मिट्टी धूल में बदलकर उड़ने लगती है।

प्रतिदिन शहर से बाहर सैकड़ों ट्रालियां बिना कवर के मिट्टी उड़ाती और गिराती फर्राटा भरती हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित विभाग कभी भी रोकटोक नहीं करता। अफसर भी मानते हैं कि यही धूल हवा में पीएम-10 की मात्रा को बढ़ा देते हैं।

रात में ठंड बढ़ने से प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं जा पाते हैं। इससे 12 से 15 फीट ऊंची एम्बीएंट क्षेत्र गैस चैम्बर में बदल जाती है, जो बड़ी खतरे की घंटी है। रात में धूल पैदा करने वाले किसी भी निर्माण व कार्य को तत्काल रोका जाना चाहिए। अथवा संबंधित विभाग उन सभी कार्यदायी एजेंसियों को निर्माणस्थल पर मानक का पालन कराने के लिए बाध्य करें। धीरे-धीरे पौधों के कटने से पर्यावरण की स्थिति खराब होती जा रही है। – प्रो. बीडी त्रिपाठी, पर्यावरण

विद्रात में पूरे दिन का प्रदूषण इकट्ठा होता है। ठंड और हवा में नमी से सांस के मरीजों को अत्याधिक परेशानी होती है। अस्थमा और सीओपीडी (सीगरेट पीने वाले लोगों को सांस की बीमारी) के मरीजों में इस धुंआ मिश्रित ठंडी हवा से सांस का अटैक आ सकता है। इस कारण जो सांस के मरीज हैं उनसे यह अपील है कि दिवाली के पांच दिन पहले और 20 दिन बाद तक अपना इनहेलर नियमित रूप से लें। जरा सी समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। – डॉ. कुमार उत्सव समरिया, चेस्ट फिजिशियन

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