राजनीति

बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर, दिलीप घोष के काफिले पर हमला

नई दिल्ली 
 पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के काफिल पर हमले के बाद खींचतान बढ़ गया है. दिलीप घोष के काफिले पर गुरुवार को उपद्रवियों ने हमला कर दिया. यह हमला तब हुआ जब उनका काफिला अलीपुरद्वार से गुजर रहा था. काफिले पर पत्थर फेंके जाने से कुछ गाड़ियों के शीशे टूट गए और कुछ गाड़ियों को भारी नुकसान हुआ. बहरहाल, बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर है. वहीं ओवैसी की एंट्री से बंगाल की लड़ाई और जबरदस्त हो सकती है. ऐसे में बंगाल को चुनावी हिंसा का डर सताने लगा है. लेफ्ट को उखाड़ फेंकने वाली ममता बनर्जी पर लेफ्ट की तर्ज पर चुनावी हिंसा फैलाने के आरोप लग रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है. कई दशकों से चली आ रही हिंसा अब भी जारी है. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में भी हिंसा भड़क गई थी. इसी हिंसा के दौरान ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति भी तोड़ दी गई थी. हिंसा के लिए बीजेपी ने जहां तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था. वहीं तृणमूल ने बीजेपी पर बाहर से भीड़ लाकर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था.
 
बंगाल में हिंसा की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में हिंसा की शुरुआत 70 के दशक में हुई जब सीपीएम उभर रही थी. फिर वो दौर भी आया जब 90 के दशक के अंतिम वर्षों में तृणमूल ने सीपीएम को चुनौती दी थी.  बदला नहीं, बदल चाई यानी बदला नहीं, परिवर्तन चाहिए का नारा देकर ममता बनर्जी 2011 में राज्य की सत्ता में आई थीं. समय बीतने के साथ ममता बनर्जी ने सीपीएम के उन नेताओं और कैडर को अपने साथ जोड़ लिया जो लेफ्ट के जमाने में चुनावी मशीनरी को कंट्रोल करते थे. 

नतीजा ये हुआ कि ममता बनर्जी पर उन्हीं हथकंडों का इस्तेमाल करने के आरोप लगे जिनके खिलाफ वो लेफ्ट से लड़ती रहीं. 2019 के लोकसभा चुनावों में जहां देश भर से चुनावी हिंसा की छिटपुट खबरें आईं वहीं बंगाल में हिंसा की खबरें सुर्खियों में रहीं. जंगीपुर, मुर्शिदाबाद और मालदा में जमकर बमबाजी, गोलीबारी हुई थी. वोटरों को डराने के लिए अपराधियों ने हवा में गोली चलाई और बम फेंके. ये ममता बनर्जी के बंगाल में हो रहा था जो बंगाल में सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराने का विरोध कर रही थीं। एक बार फिर बंगाल चुनावों की दहलीज पर खड़ा है. बीजेपी और टीएमसी के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में 2021 के विधानसभा चुनावों में भी बंगाल में खूनी खेल की आशंका है.

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