राष्ट्रीय

फिंगर-4 से चीन ने पीछे हटने के लिए रखी शर्त, भारत ने किया खारिज

नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख में मई से ही भारत-चीन के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत का सिलसिला जारी है। दोनों देशों के बीच कमांडर लेवल की आठवें राउंड की बातचीत की तारीख अभी तय नहीं है। इस बीच हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने चीन के उस शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें उसने अपने सैनिकों को फिंगर-4 से पीछे करने की बात कही है। इसके अलावा भारत ने पैंगोंग सो के दक्षिणी किनारे स्थित रेजांग ला-रेचिन ला रिज लाइन को खाली करने के प्रस्ताव को भी नकार दिया है। सीनियर मिलिटरी कमांडरों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने अपने प्रस्ताव में भारत के सामने प्रस्ताव रखा है कि दोनों सेनाएं फिंगर-4 एरिया से पीछे हट जाएं। उसने शर्त रखी है कि भारतीय सेना सिर्फ फिंगर-3 तक पट्रोलिंग करे और पीएलए फिंगर-5 तक। भारत ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है क्योंकि इस तरह विवादित फिंगर-4 एरिया चीन के अवैध कब्जे वाले अक्साई चिन का हिस्सा हो जाएगा।

मई से पहले तक भारतीय सेना फिंगर-8 तक पट्रोलिंग करती रही है। 5-6 मई की दरम्यानी रात को लाठी, कील लगे डंडे और धारदार हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने फिंगर-4 में भारतीय जवानों पर हमला कर दिया था। उसके बाद से ही चीनी सैनिक फिंगर-4 पर हैं। इतना ही नहीं, चीनी सैनिकों ने इस बीच फिंगर-4 से फिंगर-8 तक रोड का भी निर्माण कर दिया है, जिससे मामला और उलझ गया। भारत की तरफ से अभी भी फिंगर-4 रोड से नहीं जुड़ा है। भारतीय पक्ष ने चीन को अपने रुख से अगवत करा दिया है कि अतिक्रमण की शुरुआत पीएलए ने की लिहाजा पहले वह पूरी तरह से पीछे हटे। चीनी सैनिकों ने मई में पहले फिंगर-4 में भारतीय सैनिकों पर हमला किया था उसके बाद जून में गलवान घाटी में फिर गोगरा-हॉट स्प्रिंग एरिया में। उसके बाद भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग सो के दक्षिणी किनारे पर स्थिति रणनीतिक तौर पर बेहद अहम चोटियों को अपने कब्जे में ले लिया। भारत चाहता है कि जिस क्रम में अतिक्रमण हुआ, उसी क्रम में सैनिकों के पीछे हटने की भी कार्यवाही हो यानी पहले चीनी सैनिक पीछे हटें उसके बाद भारतीय सैनिक पीछे हटेंगे।

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