मध्य प्रदेशराज्य

प्रदेश सरकार करेगी ओंकारेश्वर में भी सोलर प्रोजेक्ट लॉन्च, मिलेगा ग्रीन एनर्जी से प्रदूषण मुक्त बिजली

भोपाल
रीवा सोलर पार्क के बाद अब प्रदेश सरकार ओंकारेश्वर में भी सोलर प्रोजेक्ट लॉन्च करने जा रही है। इस सोलर प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि यह पानी की सतह पर लगाया जाएगा। इससे एक ओर पानी का वाष्पीकरण कम होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रीन एनर्जी से प्रदूषण मुक्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध पर राज्य सरकार छह सौ मेगावाट का विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट शुरु करेगी। ढाई हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट से लगभग तीन रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल सकेगी। लगभग तीन हजार करोड़ की लागत से यह परियोजना पूरी की जाएगी।

 विश्व बैंक के सहयोग से इसके लिए सर्वे कराया गया है। इसके लिए विश्वस्तरीय टेंडर जारी किए जाएंगे। जो संस्था सबसे कम दामों पर इस काम को करने को तैयार होगी उसे यह काम दिया जाएगा। वर्ष 2023 तक इसे शुरु किए जाने का लक्ष्य है। नर्मदा नदी में ओंकारेश्वर बांध की लगभग बारह सौ हेक्टेयर जलसतह का उपयोग किया जाएगा। यहां फ्लोटिंग जेटी को जोड़कर उनके उपर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन पैनलों की मदद से सौर उर्जा को संग्रहित कर उसे बिजली में परिवर्तित किया जाएगा। बीच में जगह और अन्य उपयोग को मिलाकर कुल 25 सौ हेक्टेयर जल सतह पर यह फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।

प्रदेश के पांच जिलों मुरैना, छतरपुर, आगर, नीमच, शाजापुर जिलों में पैतालिस मेगावॉट के सोलर पार्क विकसित किए जाएंगे। इन पार्को पर अठारह हजार करोड़ का निवेश होगा। आगर, नीमच और शाजापुर में पंद्रह सौ मेगावाट के जो सोलर पार्क बनेंगे उनके दिसंबर 2022 तक पूरा होंने करने का लक्ष्य है। यह प्रोजेक्ट निजी संस्थाओं की मदद से शुरु किए जाएंगे। राज्य सरकार इसमें बनने वाली बिजली सबसे कम दरों पर खरीदने के टेंडर करेगी।  छतरपुर में एनटीपीसी की मदद से पंद्रह सौ मेगावट का सोलर पार्क बनाया जाएगा। मुरैना में चौदह सौ मेगावाट का सोलर पार्क बनेगा। इसके लिए बेस लाइन सर्वे शुरु हो गया है।

विश्व के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के आसपास पर्यटन गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। इस प्रोजेक्ट को पर्यटकों को दिखाने और ओंकारेश्वर टूरिस्ट सर्किट को पर्यटकों के लिए विकसित कर पर्यटन गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी।

इस प्रोजेक्ट से सबसे कम दामों पर लगभग तीन रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी। वहीं सूरज की गर्मी से जो पानी भाप बनकर उड़ जाता है उसे सोलर पैनल की मदद से रोका जा सकेगा। अन्य सोलर एनर्जी प्लांट लगाने के लिए जमीन की जरुरत होती है। उसके अधिग्रहण और अन्य खर्चे पर लगने वाली लागत भी बच जाएगी। वहीं सोलर एनर्जी से बनने वाली बिजली पर्यावरण के हिसाब से काफी अच्छी होगी और इससे पर्यावरण संरक्षण भी हो सकेगा।

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