अंतरराष्ट्रीय

 पाकिस्तान के विदेश ने कश्मीर को लेकर सऊदी अरब को चुनौती दे डाली, सऊदी अरब-पाकिस्तानी का दोस्ताना टूटा 

सऊदी अरब 
पाकिस्तान और सऊदी अरब की दोस्ती में कश्मीर को लेकर पड़ी दरार और गहरी होती नजर आ रही है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर को लेकर सऊदी अरब को चुनौती दे डाली थी. कुरैशी की टिप्पणी से नाराज सऊदी को मनाने के लिए पाकिस्तान ने अपने सेना प्रमुख कमर बाजवा को भी भेजा लेकिन इससे भी कोई फायदा नहीं हुआ. पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को अगले महीने सऊदी अरब को 2 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना पड़ सकता है.
  
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि सरकार सऊदी अरब का कर्ज लौटाने की तैयारी कर रही है और इसके साथ ही दूसरे स्रोतों से भी कर्ज जुटाने की कोशिश कर रही है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार 12 अरब डॉलर पर बना रहे. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही डांवाडोल है और महंगाई चरम पर है, ऐसे में सऊदी का कर्ज लौटाना उसके लिए बेहद कष्टदायक होगा.
 
सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब के कर्ज की दूसरी किस्त की अवधि अगले महीने पूरी हो रही है और संभावना है कि सरकार दो साल पहले लिए कर्ज को वापस कर दे. ये किस्त 1 अरब डॉलर की थी. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जब गर्त में चली गई थी और वो भुगतान संकट का सामना कर रहा था तो सऊदी अरब ने पाकिस्तान को करीब 6.2 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज दिया था. इससे पाकिस्तान डिफॉल्टर होने से बच गया था. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि ये दोनों देशों के बीच का बेहद गोपनीय मुद्दा है. हालांकि, सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि पाकिस्तान अगले महीने कर्ज लौटा दे.
  
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय को सऊदी अरब के कर्ज को लेकर सवाल भी भेजे हैं. अखबार ने वित्त मंत्रालय से ये भी सवाल किया है कि क्या पाकिस्तान सऊदी के 1 अरब डॉलर कर्ज के अलावा, यूएई के 2 अरब डॉलर का भी भुगतान करने जा रहा है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, इस बात की थोड़ी उम्मीद तो थी कि राजनीतिक स्तर पर प्रयास के बाद खाड़ी देश कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान को एक साल का वक्त और दे देंगे. हालांकि, संभावना बहुत ज्यादा भी नहीं थी.
 
सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दो बार सऊदी अरब के दौरे पर गए ताकि आर्थिक मदद हासिल की जा सके. इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भी पैकेज हासिल करने में आसानी हुई. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन साल की अवधि में करीब 6.2 अरब डॉलर का कर्ज देने पर सहमति जताई थी. इसमें 3 अरब डॉलर की नकद मदद और 3.2 अरब डॉलर की कीमत के तेल और गैस सप्लाई का भुगतान बाद में करने की छूट शामिल थी. समझौते के मुताबिक, सऊदी की कर्ज पर तेल आपूर्ति की सुविधा सिर्फ एक साल के लिए थी. इसमें एक विकल्प ये जोड़ा गया था कि अगले तीन सालों के लिए ये सुविधा बढ़ाई जा सकती है.
 
3 अरब डॉलर की तेल आपूर्ति पर पाकिस्तान को 3.2 फीसदी ब्याज चुकाना पड़ रहा था. सऊदी ने तेल आपूर्ति की सुविधा पहले ही खत्म कर दी है और इसी साल मई महीने में पाकिस्तान ने सऊदी को 1 अरब डॉलर का कर्ज भी लौटा दिया था. सूत्रों ने कहा कि सरकार सऊदी के कर्ज को चुकाने के लिए तमाम विकल्पों पर विचार कर रही है.
  
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि पाकिस्तान को चीन से 2 अरब डॉलर का कर्ज मिल सकता है. पिछली बार भी पाकिस्तान ने चीन की ही मदद से सऊदी अरब का कर्ज लौटाया था. हालांकि, अधिकारी ने ये नहीं बताया कि चीन कुछ छूटों पर कर्ज देगा या फिर ये व्यावसायिक कर्ज होगा. चीनी अधिकारियों ने चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की धीमी प्रगति को लेकर भी चिंता जाहिर की है. सूत्र ने कहा कि इसके बावजूद चीन पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को देखते हुए आर्थिक मदद के लिए एक बार फिर आगे आएगा.
 
बता दें कि वैश्विक संस्था आईएमएफ ने भी पाकिस्तान की मदद के लिए 6 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था लेकिन इसकी कड़ी शर्तों को पूरा ना कर पाने की वजह से ये पैकेज अटक गया है. पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति सही रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सूत्र ने कहा कि अगर आईएमएफ की मदद भविष्य में नहीं मिली तो वर्ल्ड बैंक भी अपना हाथ पीछे खींच सकता है. पाकिस्तान का वर्तमान में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 12 अरब डॉलर का है जिसमें ज्यादातर विदेशी कर्ज का ही योगदान है. पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा कर्ज चीन, सऊदी अरब और यूएई से ही लिया है.
 
पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति सही रखने के लिए चीन से भी 3 अरब डॉलर का कर्ज लिया था. चीन से लिए गए इस कर्ज की अवधि भी अगले साल मई महीने में पूरी हो रही है. इस बात की पूरी संभावना है कि पाकिस्तान चीन से कर्ज चुकाने के लिए और समय की मांग करेगा.

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