मध्य प्रदेशराज्य

नेपानगर सीट पर उपचुनाव को लेकर कांग्रेस-BJP बहा रही पसीना, बता रही खुद को आदिवासी हितैषी पार्टी

भोपाल
मध्य प्रदेश की बुरहानपुर की नेपानगर सीट पर उपचुनाव को लेकर कांग्रेस-बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इस सीट पर सबसे अधिक आदिवासी वोटर हैं. ऐसे में दोनों ही दल खुद को आदिवासी हितैषी पार्टी बता रहे हैं. कांग्रेस और बीजेपी आदिवासियों के बीच यह दावा करके उनके वोट अपने प्रत्याशी के पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं कि जंगलों में वनाधिकार का पट्टा आदिवासियों को अगर किसी ने दिलाया है तो हमारी पार्टी की सरकार है.

नेपानगर के आदिवासी बाहुल्य धूलकोट के बोरी गांव में पहले बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने जनसभा ली और उसमें आदिवासियों को यह यकीन दिलाया 70 साल तक कांग्रेस का देश व प्रदेश में राज था, लेकिन कांग्रेस के पास आदिवासियों के विकास का कोई खाका नहीं था. कांग्रेस केवल आदिवासियों के वोट का इस्तेमाल करती है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी का उल्लेख करते हुए वीडी शर्मा ने कहा अटल बिहारी जी की सरकार में पहली बार जनजातीय मंत्रालय बना और आदिवासियों की चिंता की गई.

इसके बाद दूसरे ही दिन कांग्रेस के आदिवासी नेता और पूर्व केंद्रीय जनजातीय मंत्री कांतीलाल भूरिया ने भी इसी जमीन पर जनसभा ली और साफ कहा बीजेपी देश के 30 लाख जंगलों में रह रहे आदिवासियों को बेदखल करने की तैयारी में थी, लेकिन कांग्रेस की यूपीए सरकार ने वनाधिकार कानून बनाया और आदिवासियों को जंगल में रहने का हक वनाधिकार पट्टा दिलाया. अब कांग्रेस बीजेपी दोनों दलों के नेताओं ने दावा तो कर दिया है कि पट्टा उनकी सरकारों ने दिलाए. अब वाकई में आदिवासियों का किस पार्टी की सरकार ने लाभ पहुंचाया इस का फैसला आदिवासी 3 नवंबर को वोट डाल कर करेंगे और इन के फैसले के लिए 10 नवंबर तक इंतजार करना होगा.

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