छत्तीसगढ़राज्य

नेता प्रतिपक्ष के बिना रायपुर निगम सामान्य सभा की हुई बैठक

रायपुर
रायपुर नगर निगम की सामान्य की बैठक शुक्रवार को निगम के सभागार में संपन्न हुई। बैठक की अहमियत इसलिए बढ़ गई कि प्रतिपक्ष के नेता की अनुपस्थिति में निगम ने अपने व्हाईट हाउस का नामकरण करते हुए उसे महात्मा गांधी के नाम पर कर दिया। साथ ही बैठक में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाने का भी निर्णय लिया। यह प्रतिमा निगम कार्यालय के बाहर स्थापित की जाएगी। हालांकि निगम के इस फैसले पर विपक्षी पार्षद मीनल छगन चौबे ने अवश्य सवाल किया कि कोरोना काल में इस पर खर्च होने वाली राशि का इंतजाम निगम कहां से करेगा।

यह पहला अवसर था जब नगर निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब बिना नेता प्रतिपक्ष के नगर निगम की सामान्य शुरू हुई हो। इस पर सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच जमकर हंगामा भी हुआ। वहीं सामान्य सभा में बुढ़ातालाब सौंदर्यीकरण के लोकार्पण में निगम सभापति का अपमान किए जाने का भी मुद्दा जोरशोर से उठा। इस दौरान कुछ देर के लिए सभा कक्ष में नोंकझोंक की स्थिति निर्मित हो गई। इसके अलावा अन्य जनहित के मुद्दों पर चर्चा के दौरान हंगामे की स्थिति नजर आई।

कोविड-19 के चलते नगर निगम की सामान्य टली जा रही थी और आखिकरार शुक्रवार की सुबह 11 बजे निगम मुख्यालय में सामान्य की बैठक शुरू हुई। बैठक शुरू होते ही एमआईसी सदस्य एवं कांग्रेस पार्षद ज्ञानेश शर्मा ने सदन में कोई नेता प्रतिपक्ष न होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि निगम के इतिहास में यह काला धब्बा है और यह भाजपा पार्षदों की पीड़ा भी है कि वे अभी तक अपना नेता नहीं चुन सके है। इस बार पूर्व नेता प्रतिपक्ष व भाजपा पार्षद सूर्यकांत राठौर और मीनल चौबे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह हमारी पार्टी का मामला है, कांग्रेस पार्षद हमारी चिंता न करें। बिना नेता प्रतिपक्ष के सदन नहीं चल सकता यह कहां का नियम है। जिनकी पार्टी में दो साल से नेता नहीं हैं, वो हमसे नेता प्रतिपक्ष के बारे में पूछ रहे हैं। यह जबाव सुनकर कई कांग्रेस पार्षद खड़े हो गए और इसका विरोध करते हुए नारेबाजी करने लगे। इस बीच सभापति प्रमोद दुबे ने दोनों पक्षा को समझाईश देते हुए मामला शांत करवाया।

इसके बाद भाजपा पार्षद सूर्यकांत राठौर ने प्रश्नकाल शुरू होने के पहले बूढ़ातालाब सौंदर्यीकरण के लोकार्पण विज्ञापन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शहर के अखबारों में छपे लोकार्पण  विज्ञापन से निगम सभापति का अपमान हुआ है। सभापति को विज्ञापन में पार्षदों के बराबर जगह दी गई है और ऐसा करने से निगम का भी अपमान हुआ है। उन्होंने कहा वे शहर विकास के हर मुद्दों का समर्थन करेंगे और सहयोग करेंगे लेकिन जहां पर भी भ्रष्टाचार की बात सामने आएगी, वे उसके खिलाफ होंगे। इतना ही नहीं, सामान्य सभा में गड़बड़ी का मुद्दा जोरशोर से भी उठाएंगे। उन्होंने कहा- शहर विकास और लोकार्पण को लेकर विज्ञापन ठीक है, लेकिन उसमें निगम सभापति को पार्षद केटेगरी में रख दिया गया है। वे यह बात, पूरे सबूत के साथ कह रहे हैं।

भाजपा पार्षदों ने राठौर का समर्थन किया और विज्ञापन में सभापति के अपमान पर आपत्ति जताई। इस बार कांग्रेस पार्षद इस मुद्दे पर अपनी तरफ से सफाई देने का प्रयास करते रहे। इस दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच थोड़ी देर के लिए नोंक-झोंक की स्थिति निर्मित हो गई थी। इस पर सभापति प्रमोद दुबे ने इस मुद्दे पर आगे और कोई चर्चा के पहले सीधे प्रश्नकाल की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया।

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