राष्ट्रीय

निकिता हत्याकांड : फिर खुलेगी 2018 अपहरण मामले की फाइल , तौसिफ पर कसेगा SIT का शिकंजा

फरीदाबाद 
निकिता हत्याकांड मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे मामले की बारीकी से जांच में जुट गई है। हत्या के आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए एसआईटी ने बारीकी से साक्ष्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में एसआईटी ने वर्ष 2018 में दर्ज अपहरण के मामले को लेकर दोबारा से फाइलों को खंगालने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, पुलिस इस मामले की जांच शुरू करने से पहले कोर्ट से अनुमति मांगी जाएगी। उधर, शुक्रवार को भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।

दरअसल, वर्ष 2018 में मृतका के पिता की शिकायत पर अपहरण का जो मामला दर्ज किया गया था, वह अदालत से रद्द करवाया जा चुका है। इस स्थिति में उस मामले की दोबारा से जांच शुरू करने से पहले पुलिस कानूनी सलाह लेकर अदालत से मंजूरी लेगी। 
 
निकिता हत्याकांड में गुरुवार को दो हत्यारोपियों को न्यायिक हिरासत भेजे जाने के बाद शुक्रवार को तीसरे आरोपी रेहान को भी अदालत में पेश किया, जहां उसे कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत परिसर में ले जाया गया। इस दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किए हुए थे। दोपहर बाद जब आरोपी रेहान को अदालत में ले जाया गया तो उस समय पुलिस पूरी तरह चौकन्नी व अलर्ट थी। गिरफ्तार अभियुक्त रेहान को न्यायिक दंडाधिकारी प्रियंका जैन की अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत भेज दिया गया है।
 
12 दिन में चालान रिपोर्ट पेश करेगी एसआईटी 
इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। एसआईटी का प्रयास है कि इस मामले में 12 दिन के अंदर चालान पेश कर दिया जाए। इस मामले की लगभग जांच पूरी हो चुकी है। इसमें पुलिस ने गवाहों की सूची भी तैयार कर ली है। साक्ष्य जुटाने के लिए एसआईटी की टीम अग्रवाल कॉलेज से मृतका निकिता तोमर के परीक्षा की तिथियों का रिकार्ड लेगी, ताकि इन सबूतों व गवाहों के आधार पर अदालत में इस मामले को साबित करने में आसानी रहे। आरोपी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत सन 2018 का मामला है। इसमें वह नामजद था। अब अदालत से अनुमति लेकर उस मामले की एसआईटी बारीकी से जांच करेगी। इसी तरह रिमांड के दौरान इनसे बरामद कार और सीसीटीवी फुटेज अहम सबूत हैं। पुलिस कार की फॉरेंसिक जांच भी करवाएगी। ताकि फॉरेंसिक सबूत भी चालान रिपोर्ट के साथ अदालत में जमा करवाए जा सकें।

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