उत्तर प्रदेशराज्य

नवम्बर की शुरुआत में इतनी ठंड हाल के वर्षों में नहीं पड़ी, तापमान नवम्बर माह की शुरुआत में ही नीचे आ गया

लखनऊ
नवम्बर की शुरुआत में इतनी ठंड हाल के वर्षों में नहीं पड़ी। प्रयागराज से लेकर लखनऊ, कानपुर और आगरा तक के रिकॉर्ड यही बता रहे हैं। न्यूनतम तापमान नवम्बर माह की शुरुआत में ही नीचे आ गया। लखनऊ में पिछले दो वर्षों के मुकाबले न्यूनतम तापमान छह से सात डिग्री नीचे चल रहा है। चार नवम्बर को यह 12.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट के कारण वायु प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। इसी वजह से लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में गुरुवार को धुंध छाई रही।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर तीन से चार महीने लॉकडाउन लगने के कारण तापमान में यह गिरावट आई है। प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों के कारण एक खोल बन गया था, जिससे धरती की गर्मी बाहर नहीं जा पा रही थी। लखनऊ विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ध्रुव सेन सिंह के अनुसार लॉकडाउन के बीच पृथ्वी की गर्मी प्राकृतिक रूप से कम हुई। लेकिन अब फिर प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, अमौसी स्थित मौसम केन्द्र के निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार यह ठंड सामान्य है। कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है।

1952 में पड़ी थी नवम्बर की सबसे अधिक ठंड
मौसम विभाग के अनुसार लखनऊ में नवम्बर माह के दौरान सबसे ज्यादा ठंड 1952 को पड़ी थी। 29 नवम्बर को 3.9 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया था।

लखनऊ में दो वर्षों के मुकाबले सात डिग्री तक फर्क
लखनऊ में दो दिनों की तुलना करें तो चार नवम्बर 2019 को न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके पहले 4 नवम्बर 2018 में न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री था। इसके मुकाबले इस बार चार नवम्बर को तापमान 12.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पांच नवम्बर 2019 को न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस था। इसके पहले 2018 को इसी दिन 15.5 डिग्री सेल्सियस। 

कानपुर में रातें पिछले वर्ष के मुकाबले ठंडी
कानपुर में पिछले वर्ष के मुकाबले तापमान कम रहा। पांच नवम्बर को न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं 2019 में न्यूनतम तापमान 18.8 रहा था। कानपुर में एक नवम्बर से ही पिछले वर्षों के मुकाबले न्यूनतम तापमान नीचे जा रहा है। चार नवम्बर को यहां का तापमान 11 डिग्री रहा जबकि पिछले वर्ष यह 19.8 डिग्री सेल्सियस था। एक नवम्बर 14.8 डिग्री दर्ज किया गया जबकि पिछले वर्ष यह इसी दिन 16.6 डिग्री सेल्सियस था।

गोरखपुर: 16 साल में 5 नवंबर का तापमान सबसे कम
गोरखपुर में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे पहले वर्ष 2004 में 5 नवंबर को न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों के मुकाबले इस साल ठंड जल्दी आ गई।

दो से तीन डिग्री नीचे चल रहा प्रयागराज में तापमान
बीते एक वर्ष की तुलना में तापमान दो से तीन डिग्री नीचे आया है। 2009 के बाद ऐसा मौसम बना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर सर्दी अपने तेवर में होगी। साथ ही इस बार कुछ अधिक सर्दी के आसार भी हैं।

मुरादाबाद में दो डिग्री कम जा रहा पारा
मुरादाबाद में नवंबर माह में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक कम तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है। पिछले सालों में नवंबर के पहले हफ्ते में न्यूनतम पारा 15 से 16 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि इस वर्ष यह 12 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है। 

अमरोहा में 12 डिग्री पर आया रात का पारा
अमरोहा में नवम्बर माह में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। बीते दो वर्षों से तुलना करें तो तापमान चार डिग्री तक कम है। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले 10 वर्षों में नवम्बर की शुरुआत में पहली बार तापमान ऐसे नीचे गया। 

आगरा में पांच डिग्री तक कम जा रहा तापमान
आगरा में पांच नवम्बर को न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री रहा। पिछले पांच वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ। 2019 में 19.5, इसके पहले 2018 में 19.2, वर्ष 2017 में 17.2 और वर्ष 2016 की पांच नवम्बर को तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 

बरेली में कोई खास अंतर नहीं
वर्ष 2019 और वर्ष 2020 के नवंबर शुरुआत के तापमान में कोई विशेष अंतर नहीं आया है। पिछले वर्ष 1 से 5 नवंबर तक  न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से 13 डिग्री के बीच रहा था। इस बार न्यूनतम तापमान 10.7 डिग्री से 13.6 डिग्री के बीच में है।

धुआं सौर धूल के कण नीचे आए
लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में गुरुवार को धुंध के कारण बदली का एहसास हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार ओस पड़ने के कारण आसमान में ऊंचाई पर पहुंचे धूल के कण व धुआं नीचे आने लगे हैं। यह धुंध के रूप में दिखाई दे रही है। वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक व स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के महानिदेशक डॉ. भरत राज सिंह के अनुसार हर साल गाड़ियां बढ़ रही हैं। इससे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन और सड़क की धूल में हर साल इजाफा हो रहा है। मौसम में गर्मी होने पर धूल के कण व धुआं ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं लेकिन जैसे ही ठंड का मौसम शुरू होता है, वे नीचे आ जाते हैं। यह स्थिति दिसम्बर माह तक बनी रहने की संभावना है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. रामकरन ने कहा कि तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है।  

सभी को मिलकर प्रदूषण पर काबू पाना होगा
डॉ. भरत राज सिंह ने बताया कि प्रदूषण की धुंध को पानी के छिड़काव व जगह-जगह स्मॉग आब्जर्वर (एयर क्वालिटी प्यूरीफायर) लगाकर ही कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह हर साल की समस्या है। आगे भी होती रहेगी। इसे समाप्त करने का अब कोई विकल्प नहीं है। लोग अपने घर के सामने व छत पर पानी का छिड़काव जरूर करें।  

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