अंतरराष्ट्रीय

नकली वेबसाइट बनाकर जालसाजों ने 27 हजार बेरोजगारों को ठगा

 नई दिल्ली
जालसाजों ने सरकार की 13000 बंपर सरकारी नौकरियां निकाल दीं। (www.sajks.org, www.sajks.com) नाम से सरकारी वेबसाइट बना डालीं। कुछ ही दिनों में देश भर के 27000 बेरोजगारों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों वसूल भी कर लिए। अलग-अलग राज्यों से शिकायतें मिलीं, तो भारत सरकार के pib को अपने ट्विटर हैंडल से बताना पड़ा कि यह सब फेक है। इसके बाद पुलिस और साइबर एजेंसियां एक्शन में आईं। पांच लोगों को गिरफ्तार कर बड़े नेटवर्क का खुलासा कर दिया। इन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कराई थीं।

दिलचस्प यह कि देशभर में करीब 15 लाख युवाओं को एसएमएस भेजे गए। जालसाजों का मुखिया 12वीं क्लास पास है और मुंडका में अपने पार्टनर के साथ ऑन लाइन एग्जाम का सेंटर चलाता है। दो अन्य आरोपियों में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर व दूसरा सॉफ्टवेयर डिप्लोमा होल्डर है। आरोपियों के खातों में कुल 49 लाख रुपये बरामद होने के अलावा तीन लैपटॉप और सात मोबाइल बरामद हुए। इन सब ने महज एक महीने के भीतर देशभर के करीब 27 हजार युवाओं से 1.09 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगी के 60 लाख रुपये आरोपी आपस में बांटकर शौक मौज में उड़ा चुके हैं। पुलिस को दूसरे मास्टर माइंड विष्णु शर्मा की तलाश है।

फर्जी वेबसाइट बनाकर 2201 खाली पदों का दिया झांसा

साइबर सेल के डीसीपी अन्येष रॉय के मुताबिक, इनवेस्टिगेशन में सबसे पहले टीम ने हिसार से जींद हरियाणा निवासी 27 वर्षीय अमनदीप को एटीएम से कैश निकालते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद हिसार निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर 35 वर्षीय जोगिंदर सिंह, 50 वर्षीय रामधारी, 32 वर्षीय संदीप कुमार और भिवानी निवासी 50 वर्षीय सुरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, शिकायत मिली थी। उसमें बताया गया था कि स्वास्थ्य एवं जन कल्याण संस्थान नामक फर्जी वेबसाइट बनाकर कुछ लोग बेरोजगारों से ठगी कर रहे हैं। एलडीसी, यूडीसी, एंबुलेंस ड्राइवर व नर्स समेत अन्य पदों के लिए 13 हजार पोस्ट निकाली गई हैं। इसके लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों से 500/400 रुपये ऑन लाइन वेबसाइट पर गेटवे के जरिए लिए जा रहे हैं। सूचना के बाद पुलिस की टीम ने वेबसाइट की जांच की तो दोनों ही वेबसाइट (www.sajks.org, www.sajks.com) फर्जी मिलीं। अभ्यर्थी जिस गेटवे के जरिए पैसे ट्रांसफर कर रहे थे, उनकी जांच की गई। पता चला कि गेटवे से कुछ खाते जुड़े हैं, उन खातों से हिसार के कुछ एटीएम में रुपये निकाले जा रहे हैं। यहीं से सुराग मिलता चला गया।

ऑनलाइन टेस्ट सेंटर भी चलाते हैं जालसाज
रामधारी अपने पार्टनर विष्णु शर्मा के साथ मिलकर दिल्ली के मुंडका इलाके में एकलव्य नाम से ऑनलाइन टेस्ट का सेंटर चलाता है। कई निजी कंपनियां व सरकारी विभाग उनके सेंटर की सेवाएं लेते हैं। इन लोगों ने करीब 550 अभ्यर्थियों के टेस्ट कराने का इंतजाम किया हुआ है। टेस्ट कराने के दौरान दोनों को नौकरी के लिए टेस्ट देने वाले देशभर के हजारों युवाओं का डेटा मिल गया। वहीं से दोनों के दिमाग में फर्जीवाड़ा करने की खुराफात आई। अगस्त में रामधारी व विष्णु ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोगिंदर की मदद से बिल्कुल सरकारी वेबसाइट से मिलती जुलती दो वेबसाइट बनवाईं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का लोगो इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि उनके अड्रेस में .org, .com का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद वेबसाइट पर 13 हजार पदों को निकाला गया। सभी पदों को ऐसा दिखाया गया जैसे सरकारी विज्ञापन में आता है।

इसके बाद फीस भी जनरल और आरक्षित पदों के लिए अलग-अलग रखी गई। इससे अभ्यर्थियों के अलावा कई जॉब पोर्टल व मीडिया एजेंसी भी धोखा खा गए। उन्होंने भी अपने यहां इन पदों की रिक्तियों के बारे में दिखाया या सूचना दी। वेबसाइट बनाने के बाद रामधारी व विष्णु ने देशभर के 15 लाख युवाओं को एसएमएस भेजे और अपनी वेबसाइट का लिंक दिया। इसके बाद करीब 27 हजार युवा इनके जाल में फंस गए। जोगिंदर ने 2 वेबसाइट बनाईं। संदीप इन दोनों वेबसाइट की देखरेख करता था। अमनदीप का काम ठगी की रकम को अलग-अलग एटीएम से निकालना था। वहीं सुरेंद्र सिंह के बैंक खातों और उसके मोबाइल का इस्तेमाल ठगी में किया गया। अभी इनके नेटवर्क में बाकियों की तलाश जारी है।

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