राष्ट्रीय

दिल्‍ली-एनसीआर उत्‍तर भारत में वायु प्रदूषण का स्तर जानलेवा ,पराली जलाने में 49% की बढ़ोतरी

चंडीगढ़
पंजाब (Punjab) में 21 सितंबर से दो नवंबर तक पराली (Stubble) जलाए जाने की पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक घटनाएं हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है. पंजाब सुदूर संवेदन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस धान के मौसम में राज्य में अब तक 21 सितंबर से 2 नवंबर तक पराली जलाने की 36,755 घटनाएं हुई हैं, जबकि 2019 में इसी अवधि में ऐसी घटनाओं की संख्या 24,726 थी.

राज्य में 2017 और 2018 में पराली जलाए जाने की घटनाओं की संख्या क्रमशः 29,156 और 24,428 रही थी. इस उत्तरी राज्य में कई किसान इस पर प्रतिबंध के बावजूद धान के पुआल को जला रहे है. पंजाब में सोमवार को पराली जलाने की 3,590 घटनाएं सामने आई हैं.

पंजाब में पराली जलाने के कारण दिल्‍ली-एनसीआर समेत उत्‍तर भारत में वायु प्रदूषण बढ़ा हुआ है. दिल्‍ल-एनसीआर में मंगलवार को भी प्रदूषण के स्‍तर में कमी नहीं आई है. आसमान में प्रदूषण की धुंध छाई है. हवा की क्‍वालिटी अब भी बेहद खराब है.

राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को हवा की गति बढ़ने से प्रदूषक तत्वों के बिखर जाने के कारण वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ था. वहीं पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं जारी रहीं. शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 रहा जो ‘खराब’’ की श्रेणी में आता है.

रविवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 364 था. दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषक कणों में पराली जलाने की भागीदारी 40 प्रतिशत रही. बता दें कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है.

दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में रविवार को आग की घटनाओं को बड़े पैमाने पर देखा गया. इसका प्रभाव दिल्ली-एनसीआर और उत्तर पश्चिम भारत की वायु गुणवत्ता पर पड़ने की संभावना है.

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