राष्ट्रीय

 दिल्ली में कोरोना संक्रमण: तीन अस्पतालों में नहीं मिला बेड, चौथे में पहुंचकर मरीज ने तोड़ दिया दम

 नई दिल्ली 
राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर मरीजों को इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। कोरोना ऐप में आईसीयू बेड उपलब्ध होने के बाद भी अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं और उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। शनिवार को रात तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित एक कोरोना के संदिग्ध मरीज को तीन अस्पतालों में भटकने के बाद भी बेड नहीं मिला। मरीज को इलाज में देर हो रही थी। चौथे अस्पताल में पहुंचकर परिजनों के मिन्नत करने के जाफी देर बाद मरीज को भर्ती तो कर लिया लेकिन अस्पताल में कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि कोरोना ऐप पर बेड खाली हैं लेकिन मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने का खेल चल रहा है। 

दिल्ली के कालका जी निवासी अमित अपने 78 वर्षीय पिता को शाम से रात तक करीब 4 घंटे तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाते रहे लेकिन उन्हें काफी देर तक बेड नहीं मिला। अमित के 78 वर्षीय पिता बी.डी शर्मा को शनिवार शाम तेज बुखार के अलावा सांस लेने में तकलीफ हुई। परिजन पहले तो पास के एक निजी अस्पताल ले गए लेकिन कोरोना संदिग्ध होने पर उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां भी उनके पिता को बेड उपलब्ध नहीं हो पाया। 

इस बीच मरीज की तबीयत काफी बिगड़ती जा रही थी। इसके बाद परिजन उन्हें दिल्ली के सबसे बड़े कोरोना अस्पताल लोकनायक में लेकर गए। दिल्ली सरकार की कोरोना ऐप के मुताबिक यहां 30 आईसीयू बेड खाली हैं। वहां इमरजेंसी में कुछ देर रखने के बाद राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल भेज दिया गया। परिजनों ने काफी गुहार लगाई की मरीज की तबीयत बिगड़ती जा रही है लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू बेड खाली होने के बावजूद भी रेफर कर दिया। राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में पहुंचने पर वहां मौजूद डॉक्टरों ने कहा कि जीटीबी ले जाइए क्योंकि उनके यहां अभी कोरोना की जांच नहीं हो सकती। परिजनों ने काफी देर तक मिन्नतें की तो मरीज को भर्ती तो कर लिया लेकिन कुछ समय बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बी एल शेरवाल ने बताया कि कोरोना की एंटीजन जांच 24 घण्टे होती है लेकिन आरटीपीसीआर जांच सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ही होती है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध मरीजों को जांच रिपोर्ट आने तक अलग क्षेत्र में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि वह पता लगाएंगे कि किस वजह से संदिग्ध मरीज को दाखिल करने में देरी हुई और जांच के लिए उसे जीटीबी भेजा जा रहा था। 

लोकनायक में बचे हैं सिर्फ बच्चों के लिए आईसीयू बेड
मरीज को लोकनायक अस्पताल से रेफर करने के सवाल पर लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि उनके यहां वयस्कों के इलाज के लिए तय अधिकतर आईसीयू बेड फुल हो चुके हैं। अभी जो कोरोना एप पर खाली आईसीयू बेड दिखा रहा है वह वे बेड हैं जो बच्चों के इलाज के लिये आरक्षित हैं। 

दिल्ली में 81 फीसदी आईसीयू बेड फुल हुए
राजधानी दिल्ली में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए तय 81 फीसदी आईसीयू बेड और 82 फीसदी वेंटिलेटर बेड फुल हो चुके हैं। दिल्ली में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए 2024 आईसीयू बेड उपलब्ध हैं जहां मरीजों को ऑक्सीजन देने की सुविधा है। इनमें से 1637 बेड फुल हैं और सिर्फ 387 बेड खाली हैं। वहीं कुल उपलब्ध 1257 वेंटिलेटर बेड में से 1029 फुल हो चुके हैं और सिर्फ 228 बेड ही खाली हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button