अंतरराष्ट्रीय

ढाका में भी हो रहे प्रदर्शन, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंदू घरों में तोड़-फोड़ की

बांग्लादेश
बांग्लादेश के कोमिला जिले में कुछ इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंदू घरों में तोड़-फोड़ की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोमिला जिले में इस्लाम से जुड़ी कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर अफवाह उड़ी जिसके बाद हिंदुओं के घर पर कुछ कट्टरपंथियों ने हमले कर दिए.
 
फ्रांस में रहने वाले एक बांग्लादेशी शख्स ने कथित तौर पर वहां के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के "अमानवीय विचारधारा" के खिलाफ कदम उठाने को लेकर तारीफ की थी. bdnews24.com की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेशी शख्स ने फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाने वाले टीचर की हत्या के बाद कट्टरपंथी इस्लाम को लेकर मैक्रों के रुख का समर्थन किया था और उसी के बाद कई हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं. रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्बो धौर के किंडरगार्टन स्कूल के हेडमास्टर ने फेसबुक पर एक पोस्ट पर कॉमेंट में मैक्रों की कार्रवाई का स्वागत किया था. फेसबुक पोस्ट को लेकर जैसे ही अफवाह फैली, शनिवार को उस इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया.
 
बांगरा बाजार पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज कमरूज अमान तालुकदार के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि रविवार को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से एक किंडरगार्टन के हेडमास्टर हैं और दूसरा शख्स अंडीकोट गांव का रहने वाला है. कोमिला जिले के डेप्युटी कमिश्नर मोहम्मद फजल मीर ने इलाके का दौरा करने के बाद bdnews24.com से बताया कि हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं. डेप्युटी कमिश्नर ने बताया कि घरों पर हुए हमले को लेकर मामला दर्ज किए जाने की प्रक्रिया जारी है.
 
उन्होंने कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो देखकर हमलावरों की पहचान करेगी. बता दें कि बांग्लादेश में फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापे जाने के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं. बांग्लादेशी अधिकारियों ने कुर्बानपुर और अंडीकोट गांव में पुलिस की भारी तैनाती की है. 
 
पुलिस ने हेडमास्टर और एक अन्य शख्स के खिलाफ डिजिटल सिक्योरिटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया है. कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी है और उन्हें लंबित ट्रायल के लिए जेल भेज दिया गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्टून प्रकाशित करने के फैसले का बचाव किया था जिसे लेकर मुस्लिम दुनिया से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. बांग्लादेश में कुछ ही दिन पहले भी मैक्रों के खिलाफ करीब 40,000 लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन किया था. ढाका में हुए प्रदर्शन के दौरान मैक्रों का पुतला जलाया गया और जमकर नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों ने कथित इस्लामोफोबिया को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को सजा देने की भी मांग की थी.
 
प्रदर्शन का आयोजन करने वाले संगठन इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (आईएबी) के वरिष्ठ नेता अताउर रहमान ने बैतूल मुकर्रम मस्जिद से रैली को दिए संबोधन में फ्रांस के राजदूत को बाहर निकालने की मांग की थी. उन्होंने कहा था, मैक्रों एक ऐसे नेता हैं जो शैतान की पूजा करते हैं. एक अन्य नेता हसन जमाल ने धमकी दी थी कि अगर फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने का आदेश नहीं आया तो कार्यकर्ता दूतावास की इमारत की एक-एक ईंट गिरा देंगे.
 
हालांकि, बांग्लादेश की सरकार ने अभी तक फ्रांस के खिलाफ कोई बयान जारी नहीं किया है. बांग्लादेश में 16 करोड़ मुसलमान रहते हैं लेकिन यहां के संविधान में धर्मनिरपेक्षता को जगह दी गई है. तुर्की, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों की सरकारों ने मैक्रों का खुलकर विरोध किया है, हालांकि, यूएई ने फ्रांस में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है और कहा कि इस तरह की गतिविधियां किसी भी धर्म के मूल्यों के खिलाफ हैं.

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