अंतरराष्ट्रीय

ड्रैगन ने उठाया यह बड़ा कदम, टेक्नोलॉजी में अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी में चीन 

 बीजिंग 
अमेरिकी की तरफ से चीन में टेक्नॉलोजी की सप्लाई रोकने और उसकी कई कंपनियों से नाता खत्म करने के बाद चीन अब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में खुद को आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। चीन ने कहा कि उसे अपनी खुद की मुख्य प्रौद्योगिकी बनाने की आवश्यकता है क्योंकि वह इसे कहीं और से खरीदने पर भरोसा नहीं कर सकता है। इसलिए, कम्युनिस्ट पार्टी ने अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए योजनाएं बनाई हैं। पांच वर्षों की आर्थिक योजना जिससे टेक्नोलॉजी और अन्वेषण के क्षेत्र में उसे आत्मनिर्भर बना सके, सीनियर कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्र को आर्थिक विकास के अगले चरण को प्रोत्साहित करने के लिए जिस तरह की तकनीक की आवश्यकता है, उसके विकास में तेजी लाई जाएगी।

इसमें जो मुख्य उपाय है वो ये कि विदेश पर निर्भरता कम करना, हालांकि इसका मतलब ये नहीं होगा कि चीन खुद को दुनिया से अलग कर लेगा। शुक्रवार को एक ब्रीफिंग के दौरान चीन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वांग झिगांग ने कहा, "उच्च तकनीकी हासिल करने के लिए चीन को दुनिया की जरूरत है और दुनिया को तेजी से चीन की जरूरत है।" उन्होंने कहा, “राष्ट्र की यह योजना है कि वे अपनी क्षमता को विकसित करे ताकि खुद अन्वेषण कर सके और वह इसे अपने दम पर बेहतर करे क्यों हम किसी और से मुख्य प्रौद्योगिकी नहीं खरीद सकते हैं और न ही उनसे इस बारे में पूछ सकते हैं।”

क्यों बीजिंग हुआ मजबूर
बीजिंग को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जल्द आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि अमेरिका अपने भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता है। अमेरिका ने अपने सहयोगियों पर यह दबाव बनाया है कि वे हुवेई टेक्नोलॉजी कंपनी से खरीदना बंद करे। अन्य चीन की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अमेरिकी पार्ट खरीदने से रोक दिया और यहां तक कि वाशिंगटन ने बाइट डांस, टिकटॉक और वीचैट पर भी बैन लगा दिया।

हालांकि, अधिकारियों ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अलग होने की संभावनाओं पर बात की और कहा कि चीन का दरवाजा विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खुला रहेगा। कम्युनिस्ट पार्टी के केन्द्रीय समिति के अधिकारी हेन वेनजुंग ने ब्रीफिंग के दौरान कहा- “पूरी तरह से अलग होना यथार्थवादी नहीं है। और न ही यह चीन, अमेरिका और दुनिया के के लिए अच्छा है।” उन्होंने कहा, “सच्चाई ये है कि कुछ ही लोग वास्तव में दोनों देशों को अलग होते देखना चाहते हैं। ज्यादातर चाहेंगि कि हमारे दोनों देश सहयोग करे और एक साथ काम करे।”

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