छत्तीसगढ़राज्य

डॉ. केके ध्रुव की जीत के साथ मरवाही पंजे के शिकंजे में

बिलासपुर
मरवाही से जोगी राज पूरी तरह से नेस्तानाबूत हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ के.के. धु्रव को पराजित करने के लिये अंतिम समय में छत्तीसगढ़ कांग्रेस जोगी का भाजपा प्रत्याशी डॉ गंभीर सिंह को समर्थन देने का पसा उलटा पड़ गया और मरवाही अब पंजा कांग्रेस के शिकंजे में आ गया। कांग्रेस और भाजपा की सीधी टक्कर में कांग्रेस के डॉ धु्रव ने भाजपा के डॉ सिंह को 38 132 मतों से पराजित कर दिया। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ के.के.धु्रव को 83,372 जिसमें 478 पोस्टल बैलेट भी मिले वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी डॉ गंभीर सिंह को 45 240 वोट मिले जिसमें 171 पोस्टल बैलेट वोट भी शामिल थे। निर्वाचन आयोग ने जैसे ही इसकी घोषणा की, वैसे ही बाहर खड़े कार्यकतार्ओं ने आतिशबाजी करते हुए डा. के.के. ध्रुव जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।

मरवाही चुनाव में जब मतों की गिनती का दौर शुरू हुआ तो कांग्रेस डॉ के.के. धु्रव ने भाजपा के डॉ गंभीर सिंह से बढ़त लेनी शुरू कर दी। यह बढ़त धीरे-धीरे बढ़ी ही गई। भाजपा प्रत्याशी डॉ गंभीर सिंह किसी भी चरण की मतगणना में डॉ के.के. धु्रव से आगे नहीं निकल सके। चौथे दौर में कांग्रेस प्रत्याशी 9 हजार से अधिक मतों से आगे  हो गये थे और 9 वें दौर मेंं मतों की गिनती में वे लगभग 20 हजार की निर्णायक बढ़त ले चुके थे। मरवाही में कांग्रेस की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी केवल देखने वाली स्थिति यह थी कि कांग्रेस यहां से कितने वोटों के अंतर से विजय हासिल करती है। मरवाही उप चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल पूर्व मुख्यमत्री व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमन प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सहित दिग्गजों ने काफी रैलियां की थी। इसके अलावा जब मरवाही जोगी विहीन हो गई तो डॉ रेणु व अमित जोगी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मजीत सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देकर कांग्रेस की जीत को कम करने का प्रयास किया।

कांग्रेस की की मरवाही जीत विकास के चश्मे से देखी जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे जिले की सौगात देने के अलावा नगर पालिका का दर्जा भी दिया और चुनाव को ध्यान में रखते हुए यहां विकास को जो तरजीह दी वह उसकी जीत का प्रमुख कारणों में से एक रहा। सुबह से ही मतगणना स्थल पर प्रदेश कांगेस कमेटी के अध्यक्ष तथा मरवाही की चुनावी कमान सम्हालने वाले मंत्री जय सिंह के साथ ही बिलासपुर के विधायक तथा अन्य वरिष्ठ नेता पूरे समय तक मौजूद रहे।

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