उत्तर प्रदेशराज्य

डॉन मुख्तार अंसारी के सात गुर्गो के नाम पुलिस ने ही गायब कर दिया

लखनऊ 
मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा बुलेट प्रूफ गाड़ी से चल रहा, दस्तावेजों में फरार। बीमा कम्पनी में फर्जी क्लेम लेने के लिए मुख्तार के दो शूटरों का आतंक। मुख्तार के साथ ही सीरियल किलर भाईयों के लिए वसूली करने वाला दबंग हिस्ट्रीशीटर…। ऐसे ही मुख्तार के सात गुर्गों का आतंक लखनऊ के कई इलाकों में है। विवादित जमीनों पर कब्जा, रंगदारी लेने वाले इन गुर्गों पर पुलिस मेहरबानी दिखा रही है। मुख्तार गिरोह के खिलाफ चल रहे अभियान में अफसरों की सूची में भी इनके नाम नदारद है।

अगस्त में बाहुबली मुख्तार उसके गिरोह पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया था। मुख्तार के कई करीबियों व गुर्गों की सम्पत्ति कुर्क की गई। अवैध मकान जमीदोंज कर दिए गए। पुलिस ने एक ही दिन में 48 टीमें बनाकर 42 स्थानों पर दबिश दी थी। पर, जिन बदमाशों के यहां पुलिस तब गई और उसके बाद से अब तक जो भी कार्रवाई की गई, उसमें मुख्तार के कई गुर्गों का नाम नहीं है।

लखनऊ के गोमती नगर विस्तार में जिस फ्लैट में छापे पर मुख्तार का करीबी बाबू सिंह मिला था, वहीं बुलेट प्रूफ गाड़ी की चाभी मिली थी। इस गाड़ी को पुलिस ने एक अपार्टमेंट से कब्जे में ले लिया था पर यह गाड़ी किसके नाम पर थी और कौन इससे फर्राटा भरता था। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस चुप बैठी हुई है। इस शख्स का नाम दो-दो हत्याओं में आया पर पुलिस उस पर मेहरबान बनी हुई है।

तीन पर गैंगस्टर पर सम्पत्ति का ब्योरा नहीं
कुछ गुर्गों की सम्पत्ति का ब्योरा तो पुलिस ने कुछ दिन में ही पता कर लिया था। पर, एक महीना पहले मड़ियांव में मुख्तार के जिन करीबियों पर गैंगस्टर लगा, उनकी सम्पत्ति जब्त करने का दावा किया गया था। पर, पुलिस इनकी एक भी सम्पत्ति का पता नहीं लगा सकी है। कैंट व कैसरबाग पुलिस ने मुख्तार के दो करीबियों को जेल भेजा था। इन पर गैंगस्टर लगा लेकिन इस एक्ट की धारा 14 (1) के तहत इनकी सम्पत्ति न तो पता लगवायी गई और न ही कुर्क करने के लिए कोई आगे की कार्रवाई हुई। पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय का कहना है कि मुख्तार के करीब एक दर्जन और गुर्गों पर जल्दी ही कार्रवाई की जानी है। अपराध से अर्जित सम्पत्ति को हर हाल में कुर्क किया जाएगा।

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